रविवार, 20 जुलाई, 2008 को 04:47 GMT तक के समाचार
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के लिए 22 जुलाई को 272 का आकड़े तक पहुंचना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.
रविवार को जहां यूपीए को झारखंड मुक्ति मोर्चा और दयानिधि मारन का समर्थन मिला वहीं राष्ट्रीय लोकदल ने यूपीए के ख़िलाफ वोट देने की घोषणा की है.
इस बीच हैदराबाद से प्राप्त समाचारों के अनुसार मजलिसे इत्तेहाद उल मुसलमीन के एकमात्र सांसद असद्दुदीन ओवैशी ने भी यूपीए को समर्थन देने की घोषणा की है.
झामुमो के लोकसभा में पांच सांसद हैं जबकि राष्ट्रीय लोकदल के तीन सांसद हैं.
बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच झामुमो नेता शिबू सोरेन ने अपने पांच सांसदों के साथ सोनिया गांधी से मुलाक़ात की.
मुलाक़ात के बाद सोरेन ने संवाददाताओं से कहा, ' हमने अपने सांसदों के साथ मिलकर तय किया है कि 22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान यूपीए के समर्थन में वोट देंगे.'
यह पूछे जाने पर कि क्या यूपीए सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री पद मिलने वाला है तो उन्होंने कहा, ' हां इस बारे में बात हुई है और हम पहले भी मंत्री थे और अब मतदान के बाद मंत्री पद दिया जाएगा और एक राज्य मंत्री भी हमारी पार्टी का बनाया जाएगा. '
उल्लेखनीय है कि मारन डीएमके नेता हैं लेकिन वो अपनी पार्टी यानी डीएमके से ख़ासे नाराज़ हैं.
मारन ने पहले कहा था कि वो वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहेंगे लेकिन अब उन्होंने सरकार के पक्ष में मत डालने की बात कही है.
अजित-मायावती मुलाक़ात
अजित सिंह ने रविवार को मायावती से मुलाक़ात के बाद पार्टी नेताओं के साथ बैठक की और यूपीए के ख़िलाफ़ वोट देने की घोषणा की.
उनका कहना था, ' हमने पार्टी नेताओं के साथ मिलकर तय किया है कि 22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान हम यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ वोट
देंगे. '
उधर राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती से मुलाक़ात की है.
लोकसभा में रालोद के तीन सांसद हैं.
कहा जा रहा है कि अजित सिंह ने अगले चुनावों को ध्यान में रखते हुए यूपीए सरकार को समर्थन नहीं देने का फ़ैसला किया है.
उल्लेखनीय है कि कैबिनेट ने अजित सिंह को रिझाने के लिए पिछले दिनों लखनऊ एयरपोर्ट का नाम उनके पिता चरण सिंह के नाम पर कर दिया है लेकिन इस बीच अजित सिंह सीपीआई नेता एबी बर्धन से भी मिले थे.
जेडी ( एस) का रवैया
उधर कर्नाटक के जेडी एस ने भी अभी अपना रवैया साफ नहीं किया है.
जेडी एस के तीन सांसद हैं और पार्टी के नेता एसडी देवगौड़ा के पूर्व के रवैये को देखकर यह कहना मुश्किल है कि वो किसे अपनी पार्टी का समर्थन देंगे.
मुलाक़ातों और बदलती निष्टाओं के दौर के बीच संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने रविवार की रात जहां गठबंधन पार्टियों और कई अन्य दलों के सांसदों को डिनर पर बुलाया है.
यह डिनर अशोक होटल में होगी जिसकी मेज़बानी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे और इसमें मीडिया को आने की अनुमति नहीं दी गई है.
झामुमो नेता शिबू सोरेन को सभी पांच सांसदों के साथ आने का न्योता मिला है और उन्होंने डिनर पर जाने की हामी भरी है.
झामुमो के अलावा कई और निर्दलीय सांसदों को भी डिनर पर बुलाया गया है लेकिन अभी तस्वीर साफ नहीं है कि कौन कौन से निर्दलीय सांसद डिनर पर पहुंचने वाले हैं.
एनडीए की डिनर कूटनीति
रविवार को जहां यूपीए अपने गठबंधन और अन्य सांसदों को डिनर पर बुला रहा है तो सोमवार को एनडीए ने भी सांसदों को डिनर पर बुलाया है.
ऐसा माना जा रहा है कि डिनर पर जाने वाले सांसदों के आधार पर तस्वीर साफ होगी कि 22 जुलाई को कौन किसके पक्ष मे वोट डालेगा.
हालांकि अलग अलग आ रही ख़बरों से लग रहा है कि असलियत संसद में ही पता चलेगी.
ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे के सांसदों को वोट बदलने के लिए मनाने में जुटे हुए हैं.
हालात ऐसे है कि एक एक वोट और यहां तक कि अनुपस्थित रहने के लिए भी सांसदों को मनाया जा रहा है.
पर्यवेक्षकों का कहना है कि अब उभर कर आई तस्वीर में भी स्पष्ट यह कहना मुश्किल है कि 22 जुलाई को यूपीए आसानी से विश्वास मत हासिल कर सकेगा लेकिन अभी भी यूपीए के पास इस काम के लिए दो दिन बाकी हैं.