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शनिवार, 19 जुलाई, 2008 को 12:49 GMT तक के समाचार

सरकार बचाने में जुटे मुलायम को झटका

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की शक्ति परीक्षण से ठीक सरकार के समर्थन में आई समाजवादी पार्टी (सपा) को ज़ोर का झटका लगा है.

पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद शाहिद सिद्दीक़ी ने सपा छोड़ बहुजन समाज पार्टी यानी 6बसपा का दामन थामने का ऐलान किया है.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ संवाददाता सम्मेलन में शाहिद सिद्दीकी ने कहा, "परमाणु क़रार मसले पर पिछले एक महीने से मैं पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था. मेरी राय में ये क़रार देशहित में नहीं है. मैं पिछले तीन साल से इसका विरोध कर रहा हूँ."

मायावती के नेतृत्व में आस्था जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने सपा छोड़ने का फ़ैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर किया है.

डील मंज़ूर नहीं

उन्होंने कहा कि वह परमाणु क़रार का पूरी ताक़त से विरोध करेंगे.

सिद्दीक़ी ने कहा, "मैं वो शख्स हूँ जिसने बुश का हाथ पकड़ा और उनसे कहा कि भारत इस क़रार को स्वीकार नहीं करेगा."

उन्होंने दावा किया कि कई सांसद परमाणु क़रार के पक्ष में नहीं हैं और मंगलवार को विश्वासमत के दौरान सरकार के ख़िलाफ़ मतदान करेंगे.

भारत-अमरीका असैन्य परमाणु क़रार पर वामपंथी दलों की समर्थन वापसी के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार पर तलवार लटकी हुई है.

यूपीए सरकार ने 21-22 जुलाई को संसद के विशेष सत्र में विश्वासमत हासिल करने का फ़ैसला किया है.

हालाँकि सिद्दीक़ी के त्यागपत्र से लोकसभा में सपा की ताक़त पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन विश्वासमत पर सरकार को बचाने की पुरज़ोर कोशिशों में जुटी पार्टी के लिए ये झटका ज़रूर है.

सपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस में रहे सिद्दीक़ी ने कहा कि वे दलित-मुस्लिम एकता और सभी जातियों के कल्याण के लिए मायावती के साथ मिलकर काम करेंगे.