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बुधवार, 16 जुलाई, 2008 को 09:28 GMT तक के समाचार

सरकार को ख़तरा है: राहुल गांधी

कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी ने परमाणु मुद्दे पर विश्वास मत के बारे में कहा है कि 'सरकार को ख़तरा है लेकिन प्रधानमंत्री नेतृत्व दिखा रहे हैं और देशहित के लिए सरकार गिरती है तो गिर जाए.'

उत्तर प्रदेश में अमेठी संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और अनेक अन्य दलों में युवाओं से उनकी बात हुई है और वे सब भारत-अमरीका परमाणु समझौते के पक्ष में हैं.

इस संदर्भ में उन्होंने ये भी कहा कि इन दलों के युवा नेताओं को ये समझ में नहीं आ रहा कि उनकी पार्टियों का नेतृत्व परमाणु क़रार के ख़िलाफ़ क्यों है. उनका कहना था कि कई पार्टियाँ ये क़दम केवल राजनीतिक मक़सदों के कारण उठा रही हैं जबकि पार्टियों के भीतर सोच कुछ और है.

'सरकार गिरती है तो गिर जाए...'

एक सवाल के जवाब में उनका कहना था, "सरकार को रिस्क (यानी ख़तरा) है. प्रधानमंत्री नेतृत्व दे रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा है कि ये समझौता देश के हित में है और मुझे उन पर पूरा विश्वास है....मैं उनका सौ प्रतिशत समर्थन करुँगा."

जब उन्हें सरकार के गिरने के ख़तरे के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "हाँ, ख़तरा है. लेकिन यदि ये लोगों के हित में है तो में तो यही कहता हूँ कि प्रधानमंत्री ये ख़तरा दोबारा उठाएँ....दोबारा उठाएँ....दोबारा उठाएँ....फिर यदि सरकार भी गिरती है तो गिर जाए..."

राहुल गांधी का कहना था कि जब प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने तय किया है कि ये (परमाणु समझौता) भारत के भविष्य के लिए सही फ़ैसला है तो फिर और कोई निर्णय करने की ज़रूरत नहीं रह जाती है.

उनका कहना था कि जब वे बच्चे थे और उनके दिवंगत पिता राजीव गांधी कंप्यूटर की बात कर रहे थे तब भी ऐसा तर्क देते हुए कहा जाता था कि इससे किसानों को क्या फ़ायदा होगा. उनका ये भी कहना था कि एक समय तो माइक्रोसॉफ़्ट के बिल गेट्स कहा करते थे कि उनके अनुमान से पूरी दुनिया में एक समय में 500 कंप्यूटर हो जाएँगे.

उनका कहना था कि कौन कह सकता है कि परमाणु ऊर्जा अगले कुछ साल में केवल तीन प्रतिशत उपलब्ध होगी, क्या पता है कि भारत का कोई प्रतिभाशाली वैज्ञानिक इससे कही अधिक ऊर्जा भारत के लिए उपलब्ध करा दे.

भाजपा की तीख़ी प्रतिक्रिया

महत्वपूर्ण है कि जब एक भारतीय टीवी चैनल ने भारतीय जनता पार्टी के नेता रविशंकर प्रसाद से राहुल के इस आरोप पर प्रतिक्रिया माँगी कि भाजपा में भी युवा नेता परमाणु करार के पक्ष में हैं तो उनकी ख़ासी तीख़ी प्रतिक्रिया आई.

उनका कहना था कि भाजपा में इस मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं हैं.

उनका कहना था, "यदि प्रधानमंत्री को खुलकर बात करनी है तो करें और कहें कि भाजपा में इस मुद्दे पर मतभेद हैं और जहाँ तक राहुल गांधी का सवाल है, वो अपनी पार्टी और सरकार की चिंता करें."