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हत्या की जाँच के लिए तैयार संयुक्त राष्ट्र

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र एक जाँच दल गठित करेगा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने जाँच के लिए पाकिस्तान सरकार के अनुरोध को सिद्धांत रुप में स्वीकार कर लिया है.

उधर संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा है कि इसके लिए सहमति तो बन गई है लेकिन इस मसले पर और विचारविमर्श की ज़रुरत होगी.

पिछले दिसंबर में एक रैली के दौरान एक आत्मघाती हमले में बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी.

इस हत्या के सिलसिले में पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है लेकिन किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से बातचीत के बाद पत्रकारों से कहा, "इस जाँच आयोग का काम दोषी, षडयंत्रकारी, इसकी योजना बनाने वाले और इसके लिए पैसा देने वालों का पता लगाना होगा."

उनका कहना है कि हालांकि बान की मून ने कहा है कि इस पर और विचार विमर्श किया जाएगा लेकिन "आयोग के कामकाज के तरीक़े, इसके खर्च, सूचनाओं तक पहुँच और आयोग की निष्पक्षता बनाए रखने के उपाय जैसे मुद्दों पर मोटे तौर पर सहमति बन गई है."

सुरक्षा में ख़ामियाँ

दिसंबर में बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क गए थे.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने हत्या के लिए अल-क़ायदा से जुड़े चरमपंथियों को दोषी ठहराया था और संयुक्त राष्ट्र से इसकी जाँच करवाने की माँग को ख़ारिज कर दिया था.

हालांकि उन्होंने पाकिस्तान पुलिस की सहायता के लिए लंदन की पुलिस स्कॉटलैंड यार्ड को ज़रुर बुलवाया था.

ब्रितानी जासूसों ने अपनी जाँच रिपोर्ट में कहा था कि उनकी राय में बेनज़ीर भुट्टो की मौत आत्मघाती हमले के बाद हुए धमाके के बाद सिर पर लगे गंभीर चोट के कारण हुई थी.

पाकिस्तान के जाँचकर्ताओं ने कहा था कि एक अकेले हमलावर ने ख़ुद को बम से उड़ाने से पहले गोलियाँ भी दागीं थीं लेकिन बेनज़ीर की मौत गोली लगने से नहीं हुई थी.

बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने इन दोनों ही जाँच निष्कर्षों को ख़ारिज कर दिया था.

पार्टी का कहना था कि बेनज़ीर भुट्टो की सुरक्षाव्यवस्था में ख़ामियाँ थीं और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई थी.

पीपीपी ने हत्यारों की पहचान और इसके कारणों का पता लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से जाँच करवाने की माँग की थी.

दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रह चुकी बेनज़ीर भुट्टो 1999 में परवेज़ मुशर्रफ़ के सत्ता संभालने के बाद से निर्वासित जीवन जी रही थीं.

संसदीय और राज्यों के चुनावों में हिस्सा लेने के लिए अक्तूबर 2007 में ही वे पाकिस्तान लौटी थीं.

उनके लौटने के तुरंत बाद कराची में उनके काफ़िले में हुए हमलों में सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी लेकिन इस हमले में वे बाल-बाल बच गईं थीं.

लेकिन दिसंबर में रावलपिंडी में हुए आत्मघाती हमले में उन्हें नहीं बचाया जा सका. उनके साथ 20 और लोगों की मौत हुई थी.