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शुक्रवार, 11 जुलाई, 2008 को 05:00 GMT तक के समाचार

भविष्य में कांग्रेस के साथ से इनकार नहीं

यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेकर विश्वासमत में उसके ख़िलाफ़ खड़े होने को तैयार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता एबी बर्धन ने भविष्य में कांग्रेस को समर्थन देने से इनकार नहीं किया है.

उनका कहना है कि हो सकता है भविष्य में ऐसा कोई अवसर आए जब सांप्रदायिक ताक़तों से लड़ने के लिए कांग्रेस और उस जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के साथ आना पड़े.

टेलीविज़न चैनल सीएनएन-आईबीएन से हुई बातचीत में सीपीआई महासचिव ने कहा कि वे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि कांग्रेस को एक संस्था की तरह देख रहे हैं.

परमाणु समझौते के मसले पर प्रणव मुखर्जी की जो स्थिति एबी बर्धन ने बयान की उसका मतलब पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मैं प्रणव मुखर्जी से इस्तीफ़ा देने के लिए नहीं कह रहा हूँ, मैं सिर्फ़ इतना कह रहा हूँ कि उन्हें अपने अंत:करण की आवाज़ सुननी चाहिए."

उन्होंने कहा, "उन्होंने दो वादे किए, उनमें से एक देश से किया हुआ था कि पहले हम विश्वासमत हासिल करेंगे और उसके बाद ही हम आईएईए के निदेशक मंडल के पास जाएँगे लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे ख़ारिज कर दिया."

यह पूछे जाने पर कि क्या प्रणव मुखर्जी के इस्तीफ़े से वे संतुष्ट होंगे, उन्होंने कहा, "प्रणव मुखर्जी ज़िम्मेदार नहीं है, उन्हें भी नीचा दिखाया गया है."

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को प्रणव मुखर्जी के बारे में एबी बर्धन ने कहा था कि उनकी स्थिति ऐसी हो गई है जिसका बचाव नहीं किया जा सकता.

उन्होंने सरकार पर ऐसे दलों को धोखे में रखने का आरोप लगाया जो उन्हें चार साल से समर्थन दे रहे थे.

यह पूछे जाने पर कि वे इसके लिए किसे दोषी ठहराते हैं, प्रधानमंत्री को या विदेश मंत्री को, तो उन्होंने कहा, "ज़ाहिर तौर पर प्रधानमंत्री को, और किसे?"

भविष्य में कांग्रेस को समर्थन के सवाल पर उन्होंने सांप्रदायिक ताक़तों से लड़ने के लिए भविष्य में कांग्रेस जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टी के साथ जाने की संभावना से इनकार नहीं किया.

लेकिन मनमोहन सिंह सरकार की बात करने पर उन्होंने कहा, "मनमोहन सिंह हमेशा प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, मैं कांग्रेस की बात एक संस्था की तरह कर रहा हूँ."

विश्वासमत के ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े होकर वोट देने के सवाल पर कहा कि वामदलों को भाजपा के साथ खड़ा करके नहीं देखना चाहिए वे सरकार के ख़िलाफ़ इसलिए वोट करने जा रहे हैं कि उस पर से विश्वास उठ गया है.