मंगलवार, 08 जुलाई, 2008 को 02:31 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इस बात का खंडन किया है कि काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हुए हमले में उनके देश का हाथ था.
कुआलालंपुर में एक बैठक में शामिल होने पहुँचे गिलानी ने पत्रकारों से कहा, "पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता क्यों फैलाएगा? अफ़ग़ानिस्तान में शांति हमारे हक़ में है. हम क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं."
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले की जाँच शुरु हो गई है.
सोमवार को हुए इस हमलें में चार भारतीय समेत 41 लोग मारे गए थे.
इस बीच तालेबान लड़ाकों ने हमले में हाथ होने से इनकार किया है.
पेशावर स्थित बीबीसी संवाददाता रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई का कहना है अफ़ग़ानिस्तान के कुछ अधिकारियों ने हमले में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की आशंका जताई है.
हालाँकि यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बयान से पहेल ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि वह इस तरह के अनर्गल बयान की निंदा करते हैं.
अफ़ग़ानिस्तानी अधिकारी इससे पहले हुए कई हमलों के लिए भी आईएसआई को ज़िम्मेदार ठहरा चुके हैं.
भारतीय दूतावास पर हुए हमले के बारे में भी यही कहा जा रहा है कि तालेबान ने आईएसआई की मदद से बम विस्फोट किया.
लेकिन आम तौर पर इस तरह के हमलों की ज़िम्मेदारी लेने वाला तालेबान इस बार हमले में हाथ होने से इनकार कर रहा है.
इससे पहले 27 अप्रैल को राष्ट्रीय परेड के दौरान हुए धमाके और सरीना होटल में हुए बम विस्फोट की ज़िम्मेदारी तालेबान ने ली थी.
हमले की निंदा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है.
इसमें भारतीय सेना के एक ब्रिगेडयर और भारतीय विदेश सेवा के एक अधिकारी समेत चार लोग मारे गए थे.
अफ़ग़ानिस्तान के सरकारी अधिकारियों के मुताबिक विस्फोटकों से भरी हुई एक कार को आत्मघाती हमलावर ने भारतीय दूतावास के गेट पर दे मारा.
इससे एक भीषण विस्फोट हुआ और बड़ी तादाद में लोग इसमें हताहत हो गए.
किसी भारतीय दूतावास पर हुआ यह शायद पहला हमला था.
इस हमले की दुनिया के कई देशों की ओर से कड़ी निंदा की गई है. दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास से जारी बयान में इस हमले पर अफ़सोस जाहिर किया गया.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि हमलावर भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बेहतरीन रिश्तों में दरार पैदा करना चाहते थे. यूरोपीय संघ ने भी कड़े शब्दों में इस आत्मघाती हमले की भर्त्सना की है.
भारत की ओऱ से एक दल हमले के बाद की स्थितियों और सुरक्षा इंतज़ामों की समीक्षा के लिए रवाना कर दिया गया है.
हालांकि विदेशमंत्री ने कहा कि इस हमले के बाद भी भारत की ओर से अफ़ग़ानिस्तान को मिल रही मदद का क्रम जारी ही रहेगा.