रविवार, 06 जुलाई, 2008 को 10:30 GMT तक के समाचार
शादी के सवाल पर अच्छे-अच्छे झेंप जाते हैं. कुछ यही हाल हुआ कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी का.
भोपाल में एक स्कूल के बच्चों ने जब राहुल से उनके शादी करने के बारे में पूछा तो राहुल झेंप गए.
शनिवार को राहुल गांधी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुँचे थे.
यहाँ उन्होंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इसी कड़ी में वो राजधानी के संस्कार वेली स्कूल में भी पहुँचे और यहाँ के बच्चों से बातचीत की.
बच्चों के बीच बैठे 38 साल के राहुल गांधी से नौंवी क्लास की एक 13 साल की लड़की मोनिका सत्यवादी ने उनके सामने शादी से जुड़े सवालों की झड़ी लगा दी. इन सवालों पर सब हंस पड़े.
उनका राहुल गाँधी से सवाल था, "आप कब शादी कर रहे हैं? आप जिस लड़की से शादी करना चाहते हैं उसमें क्या-क्या गुण होने चाहिए ताकि वो एक आदर्श जीवनसंगिनी बन सके?"
मोनिका के इस सवाल पर राहुल मुस्कुरा उठे और कहा, " मुझे उम्मीद है कि मेरी शादी जल्द हो जाएगी. मैं नहीं जानता कि मेरे लिए एक आदर्श जीवनसाथी कौन है. अगर मैं जानता होता तो उससे मेरी शादी हो चुकी होती."
राहुल का कहना था, "लेकिन मैं उस लड़की को पसंद करूँगा जो खुले विचारों वाली हो और दुनिया को लोगों के नज़रिए से देखे."
ऐसे सवालों के बाद बच्चों का खुल जाना लाज़मी था और इसके बाद बच्चों ने भी राहुल से कई तरह के सवाल किए और उन्होंने भी बड़े ही सुलझे हुए अंदाज़ में बच्चों को जवाब भी दिए.
राहुल का अनुभव
राहुल ने बाल मन से जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए. उन्होंने अपनी ज़िंदगी के अनुभव से जुड़ी कुछ कहानियाँ भी बच्चों को सुनाई.
राहुल ने बच्चों को बताया कि वो बचपन में किस तरह अंधेरे से डरते थे.
उनका कहना था, "जब मैं छह साल का था तो मुझे अंधेरे से बड़ा डर लगता था. एक दिन मेरी दादी(पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) ने मुझे अकेले अंधेरे में जाने के लिए कहा. थोड़ी देर अंधेरे में चलने के बाद मेरे अंदर से अंधेरे का डर निकल चुका था."
राहुल ने बच्चों को सलाह दी, "आप लोग भी ज़िंदगी में किसी चीज़ से नहीं घबराना."
राहुल ने बच्चों को सवाल करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि बच्चों को हमेशा 'ऐसा क्यों' पूछना चाहिए.
राहुल ने बताया कि जब वो 15 साल के थे तो उनके एक शिक्षक ने उन्हें हमेशा 'ऐसा क्यों' पूछने की आदत डलवा दी थी.
राहुल ने बच्चों को सिखाया कि ज़िंदगी में कामयाब होने के लिए उन्हें हमेशा इस बात की आदत डालनी चाहिए कि वो सोचें कि 'ऐसा आखिर क्यों नहीं हो सकता. बिल्कुल हो सकता है.'
राहुल ने इससे जुड़ी कहानी भी बच्चों को सुनाई जिसने उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव छोड़ा
. उन्होंने बताया कि जब वो 20 साल के थे और कॉलेज में पढ़ाई करते थे तो उन्हें बॉक्सिंग खेलने का शौक लगा.
लेकिन उनके कोच ने उनसे कहा कि वो ये खेल नहीं खेल सकते. इसके बाद राहुल ने इसे छोड़ने का फ़ैसला कर लिया.
राहुल की अभिलाषा
राहुल ने इस स्कूल के बच्चों को पुरस्कार भी बांटे.
बच्चों के एक सवाल पर राहुल ने बताया, "मेरे पिता हवाई जहाज़ के पायलट थे. मैंने सोचा मैं भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलूँ. एक वक्त मैंने भारतीय सेना में जाने की भी सोची. बाद में ऐसा समय भी आया जब मैं अपना ये विचार छोड़ चुका था."
राहुल ने बताया, "मेरी अभिलाषा कभी खास और तय नहीं रही. मैं कभी सेना में जनरल नहीं बनना चाहता था. लेकिन मेरी कामना हमेशा से ये रही है कि मुझे भारत और लोगों के बारे में अच्छी समझ हो ताकि मैं अपनी थोड़ी सी कोशिश के ज़रिए भारत को और आगे बढ़ा सकूँ."
राहुल गांधी ने स्कूली छात्रों को अपनी दादी के बारे में बताते हुए प्रेरित किया.
उन्होंने बताया, "मेरी दादी मेरी शिक्षिका थीं जैसे स्कूलों की शिक्षिकाएँ होती हैं. वो हमेशा कहा करती थीं कि बेटा अगर तुम्हें किसी चीज़ से डर लगता है तो उससे भागो मत. उसके सामने डट कर खड़े हो जाओ. तुम्हारा डर ख़त्म हो जाएगा."