गुरुवार, 03 जुलाई, 2008 को 13:54 GMT तक के समाचार
पाकिस्तानी मंत्रिमंडल ने मृत्युदंड का सामना कर रहे हज़ारों लोगों की सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.
सूचना मंत्री शेरी रहमान ने बताया कि मंत्रिमंडल के इस फ़ैसले से सात हज़ार लोगों को फांसी के फंदे से बचाया जा सकेगा.
लेकिन अभी ये स्पष्ट नहीं है कि सज़ा में कमी का लाभ आतंकवाद और जासूसी जैसे अपराध के मामलों में मिलेगा या नहीं.
भारत के सरबजीत सिंह के बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तानी सूचना मंत्री ने कहा, "सरबजीत का मामला अलग है, इस पर सरकार ने अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है."
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, "हम आशा करते हैं कि इससे फांसी के फंदे का सामना करने वाले सभी लोगों को छुटकारा मिलेगा, उनके बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा."
एमनेस्टी ने कहा, "हम राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से अनुरोध करेंगे कि वे इस फ़ैसले पर तुरंत मुहर लगाएँ, अगर ऐसा होता है तो दुनिया भर में मृत्युदंड की सज़ा में एक झटके में एक-तिहाई की कमी आ जाएगी."
एमनेस्टी का कहना है कि यह आधुनिक इतिहास में फाँसी की सज़ा से सामूहिक तौर पर दी गई सबसे बड़ी राहत होगी.
मानवाधिकार संगठन की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है, "इससे फांसी की सज़ा को समाप्त करने की दिशा में जनमत तैयार करने के अभियान को बल मिलेगा."
स्पष्ट नहीं
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की सहमति मिलने के बाद ही इस फ़ैसले पर अमल हो सकेगा.
वर्ष 2002 में मुशर्रफ़ के नेतृत्व वाली सरकार ने मृ्त्युदंड का सामना कर रहे कई क़ैदियों की सज़ा में कमी कर दी थी.
इस फ़ैसले की घोषणा 25 जून को प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी ने की थी और अब इसे कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है.
प्रधानमंत्री के एक सलाहकार ने कुछ दिनों पहले कहा था कि इस प्रस्ताव के तहत आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े लोगों को राहत नहीं मिलेगी, लेकिन इस मामले पर स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है.