गुरुवार, 03 जुलाई, 2008 को 02:54 GMT तक के समाचार
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को आवंटित ज़मीन का फ़ैसला रद्द करने के विरोध में गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद के देशव्यापी बंद के दौरान इंदौर में चार और सतना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है. उधर जम्मू में उग्र प्रदर्शन हुए हैं.
पुलिस के अनुसार इंदौर के कई इलाक़ों में पथराव हुआ है और कई स्थानों पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और गोलियां चलानी पड़ी हैं.
मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) संजीव सिंह ने बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली को बताया, "इंदौर में बंद के दौरान हुई झड़पों में चार आम नागरिक मारे गए जबकि एक पुलिसकर्मी की हालत गंभीर है. चार थाना क्षेत्रों में कर्फ़्यू लगाया गया है."
मध्य प्रदेश में ही सतना में बंद से संबंधित हिंसा में एक व्यक्ति ने ख़ुद को आग लगा ली और मारा गया, वहीं झबुआ में धारा 144 लगाई गई है और जबलपुर में अभिनव भारत नाम के संगठन के 187 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
बंद का कई राज्यों में असर दिखा और जनजीवन प्रभावित हुआ. इस बंद को विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ हिंदूवादी संगठनों बजरंग दल और शिवसेना का भी समर्थन हासिल था. अखिल भारतीय व्यापारी महासंघ ने भी बंद के समर्थन में दुकानें बंद रखने का आहवान किया और कई जगह व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे.
जम्मू में कर्फ़्यू का उल्लंघन कर लोगों ने उग्र प्रदर्शन किए जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने बंद की अवधि अगले 72 घंटे बढ़ा दी है.
बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी के अनुसार जम्मू में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में 15 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं और बीजेपी के कई नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है.
राज्य सरकार ने केंद्र से रैपिड एक्शन फोर्स की कंपनियां मंगाई हैं. उधर कठुआ, मोगा, उधमपुर, भद्रवाह, विजयापुर, मुठी, गंगयाल, बख्शीनगर और कुछ अन्य स्थानों पर कर्फ़्यू लगा हुआ है और कई स्थानों पर उग्र प्रदर्शन हुए.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अमरनाथ की यात्रा से वापस लौट रहे तीर्थयात्रियों पर भी हमला किया गया जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैं.
कई राज्यों में असर
मध्य प्रदेश और भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र के अलावा, झारखंड, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक में भी कई जगह पर बंद का काफ़ी असर देखा गया.
झारखंड में इक्का-दुक्का दवा दुकानों को छोड़ कर सारी दुकानें बंद रहीं और बंद ख़ासा प्रभावी रहा.
बिहार से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के मुताबिक कुछ स्थानों पर ट्रेनें रोकी गईं लेकिन किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं मिला.
कर्नाटक के कई हिस्सों में दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सार्वजनिक बस सेवा पर भी असर पड़ा. लेकिन बंगलौर में बंद का ज़्यादा असर नहीं दिखा.
राजस्थान से बीबीसी संवददाता नारायण बारेठ के अनुसार राजधानी जयपुर में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे लेकिन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सामान्य रही हैं.
अजमेर में बंद का व्यापक प्रभाव दिखा लेकिन किसी अप्रिय घटना के समाचार नहीं मिले. सड़कों पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के जत्थे बंद को कामयाब बनाने के लिए घूमते हुए देखे गए.
अखिल भारतीय व्यापारी महासंघ के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "ज़मीन वापस लेने के जम्मू-कश्मीर सरकार के फ़ैसले से देश की धार्मिक भावना आहत हुई है. इसलिए हमने बंद का समर्थन किया."
भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने ज़मीन वापस लेने के जम्मू-कश्मीर सरकार के फ़ैसले को संवैधानिक मर्यादा के ख़िलाफ़ बताया है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "सरकार ने अमरनाथ यात्रियों की सुविधा के लिए थोड़ी सी ज़मीन दी थी लेकिन अलगाववादियों के दबाव में इसे वापस ले लिया गया."
उनका कहना था, "ये संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता की भावना के साथ खिलवाड़ है. हम इसका शांतिपूर्वक विरोध करेंगे."