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सोमवार, 30 जून, 2008 को 20:06 GMT तक के समाचार

सपा के रुख़ पर टिकीं निगाहें

परमाणु समझौते पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के अल्टीमेटम के बाद सबकी निगाहें समाजवादी पार्टी पर लगी हैं.

समाजवादी पार्टी (सपा) सोमवार को यह संकेत देती नज़र आई कि वह कांग्रेस के ख़िलाफ़ नहीं है.

ख़बरें हैं कि समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह ने सोमवार को देर रात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी से मुलाक़ात की.

सपा नेता अमरसिंह ने विदेश यात्रा से लौटने के बाद एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि अगर प्रधानमंत्री बातचीत की इच्छा रखते हैं तो उनसे बातचीत करने में कुछ भी ग़लत नहीं है. आप उनसे सहमत या असहमत हो सकते हैं, लेकिन राजनीति में संवादहीनता का कोई स्थान नहीं है.

अमर सिंह का कहना था,'' मैं जोर देकर कह रहा हूँ कि राजनीति पूर्वाग्रह और निजी अहम से निर्देशित नहीं होनी चाहिए. यही कारण है कि हम देखेंगे कि इस संकट को टालने के लिए क्या बेहतर किया जा सकता है.''

उनका कहना था कि वो अपने पार्टी सहयोगियों से विचार विमर्श करेंगे और सीपीएम महासचिव प्रकाश करात से भी मुलाक़ात करेंगे.

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी और कांग्रेस के बीच कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है और सपा तीन जुलाई को यूएनपीए की बैठक में अपने रुख़ के बारे में फ़ैसला करेगी.

प्रेक्षकों का कहना था कि समाजवादी पार्टी की ओर से ये बयान अहम माने जा रहे हैं.

इससे ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि परमाणु समझौते पर 59 सदस्यों वाले वामपंथी दलों के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेने की स्थिति में समाजवादी पार्टी मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार का समर्थन कर सकती है.

ग़ौरतलब है कि संसद में समाजवादी पार्टी के 39 सदस्य हैं.