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अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

सातवें दिन भी घाटी में रहा पूर्ण बंद

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने की पेशकश के विरोध में भारत प्रशासित कश्मीर घाटी में पूर्ण रूप से बंद रहा.

उधर भारतीय जनता पार्टी सहित राज्य के कई हिंदूवादी और सामाजिक संगठनों ने इस ज़मीन को वापस लेने की पेशकश के विरोध में जम्मू बंद का आहवान किया है.

घाटी में लगातार सातवें दिन दुकानें, बैंक, शिक्षण संस्थाएं और सरकारी दफ़्तर पूरी तरह से बंद रहे और यातायात पूरी तरह से रुका रहा.

पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्र बारामूला में विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए अश्रुगैस छोड़ी.

राजधानी श्रीनगर में प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद शाह गीलानी के नेतृत्व में पुराने शहर में एक बड़ा जुलूस निकाला गया.

अमरनाथ जमीन मुद्दे पर पिछले एक सप्ताह से चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर हुई पुलिस फ़ायरिंग में अब तक चार लोग मारे गए हैं.

पिछली रात अस्पताल में मारे गए एक प्रदर्शनकारी के शव को लेकर जा रही गीलानी की गाड़ी पर सीआरपीएफ़ ने हमला किया.

मुफ़्त सामुदायिक रसोई

राज्य में आम दिनों के मुक़ाबले कम सुरक्षाबल दिखाई दे रहा है.

अलगाववादी नेता इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि ज़मीन का यह मुद्दा कोई सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है.

अलगाववादी नेताओं की अपील के बाद अमरनाथ के श्रद्धालुओं और बंद की वजह से फंसे आम पर्यटकों के लिए श्रीनगर के डलगेट क्षेत्र में मुफ़्त सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की है.

इसके बावजूद यह विवाद राज्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की वजह बनता दिख रहा है.

कश्मीर की घाटी में मुसलमान बहुसंख्यक हैं लेकिन जम्मू के हिंदू बहुल क्षेत्र भी सोमवार को हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के आह्वान के बाद बंद रहे.

मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा के बंद के आह्वान को नज़रअंदाज़ किया गया और कश्मीर घाटी की ज़मीन देने की माँग का समर्थन किया गया.

कांग्रेस के नेतृत्ववाली राज्य की गठबंधन सरकार के प्रमुख घटक पीडीपी और नेशनल कांफ़्रेंस ने सरकार की भूमि आवंटन को वापस लेने की पेशकश का स्वागत करते हुए कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर केवल घोषणा करने के बजाय औपचारिक रूप से भूमि वापसी की व्यवस्था करे.