शनिवार, 28 जून, 2008 को 07:30 GMT तक के समाचार
अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान के कुछ हिस्सों में तालेबान के हमलों में तेज़ी आ सकती है.
रक्षा मंत्रालय ने आशंका जताई है कि तालेबान इस वर्ष देश के उत्तरी और पश्चिमी इलाके में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास करेगा.
हालांकि पिछले दिनों में अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सेनाओं की मदद से चलाए जा रहे तालेबान विरोधी अभियान को सफलता भी मिली है.
पर तालेबान के वर्चस्व में इजाफ़े की ताज़ा आशंकाओं को लेकर रक्षा मंत्रालय चिंतित है.
ग़ौरतलब है कि पिछले ही दिनों अमरीका के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने अपने अध्ययन में पाया था कि तालेबान के हमलों में इस वर्ष 40 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है.
अमरीकी प्रशासन ने इसपर चिंता व्यक्त की थी. अमरीकी रक्षा मंत्री राबर्ट गेट्स ने इस मुद्दे पर ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि तालेबान से निपटने की कोशिशों में पाकिस्तान की ओर से ढीलापन चिंताजनक है.
'पाकिस्तान भी ज़िम्मेदार'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी अफ़ग़ानिस्तान से लगी सीमा पर चरमपंथी गतिविधियों को नियंत्रित कर पाने में अक्षम रहा है.
परिणाम यह है कि इस ढीलेपन की वजह से चरमपंथी गतिविधियों में ख़ासी तेज़ी आई है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इसी लापरवाही की वजह से पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के हमलों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है.
रक्षामंत्री के इस ताज़ा बयान के एक दिन बाद ही सार्वजनिक हुए पेंटागन के ताज़े सर्वेक्षण ने अमरीका की चिंता को और मज़बूत किया है.
पेंटागन की ओर से किए गए इस ताज़ा अध्ययन में कहा गया है कि सत्ता और प्रभुत्व से बाहर होने के बाद से अब तालेबान ने खुद को फिर से संगठित करने का काम किया है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तालेबान ने कबायली और भीतरी इलाकों को अपने अभ्यारण्यों के तौर पर इस्तेमाल किया है ताकि वो फिर से संगठित हो सके.
पेंटागन का यह अध्ययन बताता है कि तालेबान के वर्चस्व का मज़बूत होना अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चिंता और चुनौती का विषय है.