शनिवार, 28 जून, 2008 को 19:16 GMT तक के समाचार
भारत-अमरीका परमाणु समझौते को लेकर केंद्र सरकार के साथ जारी गतिरोध के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के पोलित ब्यूरो की रविवार को बैठक होने जा रही है.
माना जा रहा है कि इस बैठक में परमाणु समझौते और समय से पहले चुनाव होने की संभावना पर विचार किया जाएगा.
सीपीएम नेता नीलोत्पल बसु ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि पोलित ब्यूरो की बैठक में राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी.
उनका कहना था कि इसमें परमाणु समझौता, बढ़ती महँगाई और जम्मू कश्मीर के हालात शामिल हैं.
परमाणु समझौते के अलावा वामपंथी बढ़ती महँगाई को लेकर भी सरकार के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की योजना बना रहे हैं.
इस बैठक में पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों के अलावा पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे.
इसके पहले सीपीएम की केंद्रीय समिति परमाणु समझौते के संबंध में ज़रूरी क़दम उठाने का अधिकार पोलित ब्यूरो को सौंप चुकी है.
इन विकल्पों में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेना भी शामिल है.
नाराज़गी
इसके पहले सीपीएम ने मौजूदा राजनीतिक संकट के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज़िम्मेदार ठहराया था.
पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी में महासचिव प्रकाश कारत ने लिखा था कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की मंज़ूरी लेने की पहल की और यही राजनीतिक संकट की वजह है.
उन्होंने लिखा था कि अमरीका के दबाव के कारण प्रधानमंत्री इस समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें इसके नतीजों की चिंता नहीं है.
उन्होंने मौजूदा राजनीतिक संकट पर चेतावनी देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और अन्य सांप्रदायिक शक्तियाँ इस स्थिति का लाभ उठा सकती हैं.
प्रकाश कारत ने उम्मीद जताई थी कि कांग्रेस नेतृत्व स्थिति की गंभीरता को समझेगा.