http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 27 जून, 2008 को 17:10 GMT तक के समाचार

दो लोगों को सरेआम मौत की सज़ा

पाकिस्तान के कबीलाई इलाक़े में चरमपंथियों ने अफ़ग़ानिस्तान के दो नागरिकों को सरेआम मौत के घाट उतार दिया. वारदात के समय वहाँ हज़ारों लोग मौज़ूद थे.

यह घटना अफ़ग़ानिस्तान सीमा के निकट कबीलाई इलाक़े बाजौर से 10 किमी दूर खार की है.

तालेबान का कहना है कि दोनों ने अमरीकी सेना को मिसाइल हमले करने में मदद की थी. पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान सीमा के पास हुए इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई थी.

तालेबान की मौज़ूदगी

संवाददाताओं के अनुसार चरमपंथियों ने एक व्यक्ति का सर कलम कर दिया और दूसरे की गोली मार कर हत्या कर दी. घटना से इस बात का पता चलता है कि पाकिस्तान में तालेबान किस तरह मज़बूत हो रहे हैं.

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता इलियास ख़ान का कहना है कि कबीलाई इलाक़ों में हज़ारों लोगों की भीड़ के सामने इस तरह किसी को मौत के घाट उतार देना असाधारण घटना तो है लेकिन अनोखी नहीं.

घटना के समय वहाँ मौज़ूद एएफ़पी के संवाददाता ने बताया कि वारदात के समय वहाँ एक खुले मैदान में लगभग पाँच हज़ार लोग मौज़ूद थे.

स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि दो दिन पहले तालेबान ने दो लोगों का अपहरण कर लिया था.

एएफ़पी संवाददाता के अनुसार तालेबान ने दोनों लोगों पर जासूसी करने का आरोप लाउडस्पीकर पर लगाया था.

तालेबान का आरोप था कि इन लोगों की जासूसी के बाद ही बाजौर के डामाडोला इलाक़ें में अमरीकी मिसाइल से हमला किया गया.

मिसाइल हमले में दो चरमपंथी नेताओं के घरों को निशाना बनाया गया था. जिससे 14 लोगों की मौत हो गई थी.

एएफ़पी के संवाददाता ने बताया, "दोनों लोगों के चेहरे ढंके हुए थे और हाथ बंधे हुए थे. एक व्यक्ति का गला जब चाकू से रेता जा रहा था तो वह "अल्लाहो अकबर" का नारा लगा रहा था, जबकि दूसरे पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसाकर उसे मौत के घाट उतार दिया गया.'"

ज़श्न मानाने में दो मरे

दोनों व्यक्तियों की हत्या करने के बाद चरमपंथियों ने ख़ुशी का इज़हार करने के लिए अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें वहाँ खड़े दो लोगों की मौत हो गई.

उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में चरमपंथियों और सरकार के बीच हुए शांति समझौते के बाद भी हाल के दिनों में हिंसा की घटनाएँ बढ़ गई हैं.

यह वारदात को अमरीकी रक्षा मंत्री के उस बयान के बाद अंज़ाम दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अपने सीमाई इलाक़ों में तालेबान पर दबाव बनाने में नाकाम रहा है, जो कि चिंता का विषय है.