शुक्रवार, 27 जून, 2008 को 07:05 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को 40 हेक्टेयर वनभूमि दिए जाने के मुद्दे पर लगातार चौथे दिन भी प्रदर्शनों को दौर जारी है. कश्मीर घाटी में शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र चौकसी बरती जा रही है.
राजधानी श्रीनगर में सिविल लाइन्स इलाक़े और मौलाना आज़ाद रोड से एक विशाल प्रदर्शन निकाला गया है जिसमें हज़ारों लोगों ने भाग लिया है. अब तक घाटी से कोई अप्रिय घटना होने की ख़बर नहीं है.
अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला उस समय राज्य के राज्यपाल ने लिया था. शुरुआत में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व अलगाववादी संगठनों ने किया था और इन प्रदर्शनों के कारण जन-जीवन ख़ासा प्रभावित हुआ है.
घाटी में सोपोर, अनंतनाग और शोपियान में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं. चार दिनों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फ़ायरिंग में अब तक तीन लोगों के मारे गए है.
जनजीवन प्रभावित
ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को प्रशासन ने केंद्रीय रिज़र्व पुलिस को घाटी में अनेक जगहों से हटा लिया है और उसकी जगह राज्य की पुलिस को तैनात किया गया है.
पिछले कुछ दिनों में सीआरपीएफ़ के ख़िलाफ़ कुछ जगहों पर पथराव करने के आरोप लगे थे.
पिछले कुछ दिनों से प्रदर्शनों के बीच किसी भी वाहन को सड़क पर उतरने नहीं दिया जा रहा था और अस्पताल जा रही एंबुलेंस भी इसमें शामिल थीं.
शुक्रवार को शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसिस के निदेशक डॉक्टर अब्दुल हमीद ने प्रदर्शनकारियों से अपील की थी कि वे एंबुलेंस का रास्ता न रोकें और उन्हें सड़कों से गुज़रने दें. इसके बाद स्थिति में कुछ बदलाव आया है और एंबुलेंस सड़कों से गुज़र रही हैं.
उधर राजनीतिक स्तर पर राज्य के उप मुख्यमंत्री मुज़फ़्फ़र बेग ने उम्मीद जताई है कि राज्य के नए राज्यपाल एनएन वोहरा इस मसले का हल खोजने के लिए कुछ पहल करेंगे.
उम्मीद जताई जा रही है कि अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दिए जाने के ख़िलाफ़ विरोध को देखते हुए वे राज्य सरकार के मंत्रिमंडल को इस बारे में पत्र लिख सकते हैं और स्थिति में कुछ बदलाव हो सकता है.
गुरुवार को जम्मू क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू बाहुल्य जम्मू क्षेत्र में हड़ताल का आहवान किया था जो ख़ासा असरदार रहा था. लेकिन इससे राज्य में सांप्रदायिक स्तर पर विभाजन का ख़तरा भी नज़र आने लगा है.