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गुरुवार, 26 जून, 2008 को 10:53 GMT तक के समाचार

अमरनाथ ज़मीन मुद्दा और गहराया

भारत प्रशासित कश्मीर में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को पास की वनभूमि दिए जाने के राज्यपाल के फ़ैसले के विरोध में गुरूवार को लगातार तीसरे दिन भीषण विरोध प्रदर्शन हुए हैं और जन-जीवन लगभग पूरी तरह से ठप्प हो गया.

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार राजधानी के अलावा घाटी में सोपोर, अनंतनाग और शोपियान से विरोध प्रदर्शनों और पुलिस के साथ झड़पों की ख़बरें आ रही है.

घाटी में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फ़ायरिंग में अब तक तीन लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

पूरी घाटी में शहरों और कस्बों में गुरुवार को दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी कम ही दिखाई दे रही है.

स्कूल, कॉलेज और बैंक भी बंद हैं. अधिकतर दफ़्तर बंद हैं या फिर कुछ सीमित से कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं.

उधर विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू बाहुल्य जम्मू क्षेत्र में हड़ताल का आहवान किया है. राज्य में सांप्रदायिक स्तर पर विभाजन का ख़तरा पैदा हो गया है.

जम्मू से बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी के अनुसार इन संगठनों का कहना है कि जम्मू में प्रदर्शन इसलिए किया गया है ताकि एक हिंदू तीर्थस्थल को ज़मीन देने से रोकने के कश्मीर केंद्रित राजनीतिक षडयंत्र के ख़िलाफ आवाज़ उठाई जा सके.

जम्मू में प्रदर्शनकारियों ने कश्मीरी नेताओं और अलगाववादियों के विरुद्ध नारे लगाए.

'सर्वदलीय बैठक निर्रथक'

मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बुधवार को जल्दबाज़ी में बुलाए एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुला रहे हैं.

लेकिन इसके बाद भी प्रदर्शनों में कोई कमी नहीं आई है. यहाँ तक कि सरकार में कांग्रेस की सहयोगी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने सर्वदलीय बैठक को 'निर्रथक' कहा है और इसे ख़ारिज कर दिया है.

विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व अलगाववादी संगठन कर रहे हैं. उनका कहना है कि अमरनाथ मंदिर प्रबंधन बोर्ड के 40 हेक्टेयर ज़मीन दिया जाना एक साज़िश है ताकि 'ऐसे ग़ैर-मुस्लिम लोगों को घाटी में बसाया जा सके जो कश्मीरी नहीं हैं.'

हालाँकि, मुख्यमंत्री आज़ाद ने कहा कि अमरनाथ गुफ़ा के आसपास दी गई ज़मीन पर तब तक कोई भी निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा जब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता.