गुरुवार, 26 जून, 2008 को 13:29 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र के पुणे विश्वविद्यालय में एक प्रोफ़ेसर हरि नारके ने लिखा है कि ठाकरे परिवार दो पीढ़ी पहले ख़ुद नौकरी की तलाश में मुबंई आया था ऐसे में जो लोग भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई नौकरी की तलाश में आते हैं उनके साथ मारपीट करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है.
पुणे विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हरि नारके ने यह लेख राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखपत्र 'राष्ट्रवादी' के इस महीने के अंक में लिखा है.
बीबीसी के साथ संक्षिप्त बातचीत में प्रोफ़ेसर नारके ने इसकी पुष्टि की है.
प्रोफ़ेसर नारके ने बताया कि उन्होंने बाल ठाकरे के पिता प्रबोधन्कर ठाकरे की मराठी में लिखी आत्मकथा के आधार पर ये बातें लिखी है.
'दादा की आत्मकथा पढ़ें'
हरि नारके ने अपने इस आलेख में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे को भी निशाना बनाया है.
कुछ महीने पहले राज ठाकरे के समर्थकों ने मुंबई में ग़ैर-मराठियों पर हमले किए थे.
प्रोफ़ेसर हरि नारके ने लिखा है, "राज ठाकरे को अपने दादा प्रबोधन्कर ठाकरे की आत्मकथा पढ़नी चाहिए. प्रबोधन्कर ने शिक्षा मध्यप्रदेश में पाई थी. उन्होंने लिखा है कि किस तरह वे कामकाज की तलाश में दूसरे राज्यों में गए."
नारके कहते हैं, "इससे साबित होता है कि ठाकरे मुबंई के मूल निवासी नहीं है और वे काम-काज की तलाश में इस शहर में आए थे."
इस आलेख के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने प्रबोधन्कर के साहित्य को नारके के कहने पर वर्ष 1995 में छपवाया था.
नारके ने लिखा है कि जो ख़ुद ही नौकरी की तलाश में इस शहर आए थे उन्हें दूसरे ऐसे लोगों के साथ मारपीट करने का अधिकार नही है जो नौकरी की तलाश में यहाँ आते हैं.