बुधवार, 25 जून, 2008 को 07:20 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में अधिकारियों का कहना है कि उन्हें 22 बुज़ुर्ग क़बायलियों के शव मिले हैं. अधिकारियों के अनुसार सोमवार को स्थानीय तालेबान ने उनका अपहरण कर लिया था.
इन लोगों के शव पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े दक्षिणी वज़ीरिस्तान में मिले हैं. बताया जा रहा है कि ये घटना क़बायिलियों की आपसी दुश्मनी का नतीजा है.
अपहरण करने वाले चरमपंथियों को पाकिस्तान में तालेबान के समर्थक बताया गया है.
चरमपंथियों ने इस क्षेत्र के दक्षिण-पूर्व में स्थित जंडोला नगर पर पूरी तरह कब्ज़ा कर लिया है.
वहाँ चरमपंथियों की भिटानी क़बीले के लोगों से झड़पें भी हुईं, जो सरकार के समर्थक माने जाते हैं.
जंडोला शहर में पुराना किला मौजूद है जहाँ तालेबान सक्रिय है और उन्होंने इसे अपना अड्डा बना रखा है.
बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट के मुताबिक ऐसा तब हुआ है जब पाकिस्तानी सेना दक्षिणी वज़ीरिस्तान में बड़ा सैन्य अभियान चला रही है.
अब सरकार बातचीत के ज़रिए इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रही है.
लेकिन इस पर नैटो और अफ़ग़ान सेनाएँ नाराज़ हैं क्योंकि उन्हें चिंता है कि इससे अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान को बल मिलेगा.
पुरानी क़बायली दुश्मनी
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि मारे गए लोगों के शव जंडोला नगर के बाहर सड़के के किनारे फेंक दिए गए थे.
उनका कहना है कि ये क़बायलियों के बुज़ुर्ग लोग थे जिन्हें पिछले हफ़्ते बंदी बना लिया गया था.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार जिन क़बायली लोगों ने इन्हें बंदी बनाया था वे महसूद क़बीले के हैं जिन्हें पाकिस्तानी सेना के अभियान के तहत कहर का सामना करना पड़ा है.
भिटानी क़बीले के मारे गए लोगों की महसूद क़बीले के लोगों के साथ पुरानी दुश्मनी है.
पर्यवेक्षकों का कहना है कि भिटानी क़बीले के लोगों ने महसूद क़बीले के ख़िलाफ़ सेना को सहयोग दिया था.
ये भी बताया गया है कि भिटानी क़बीले के लोग उनके इलाक़े से गुज़रने वाले महसूद क़बीले के लोगों के वाहन रोक रहे थे और महिलाओं की भी तलाशी ले रहे थे, जो क़बायली समाज में बहुत बुरा माना जाता है.
सेना ने जंडोला अड्डे से सैनिकों को तैनात किया था लेकिन महसूद क़बीले के लोग पीछे हट चुके हैं और इस घटना से सरकार और महसूद क़बीले के बीच चल रही शांति वार्ता को कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.