संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने बीबीसी को बताया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान विद्रोहियों ने वर्ष 2007 में अफ़ीम के किसानों से उगाही के रूप में लगभग दस करोड़ डॉलर कमाए हैं.
बीबीसी को ये जानकारी संयुक्त राष्ट्र की नशीले पदार्थों पर नियंत्रण रखने वाली एजेंसी - यूनाइटेड नेशन्स ऑफ़िस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम के अध्यक्ष एंटोनियो मारिया कोस्टा ने दी है.
उनका कहना है कि तालेबान ने अपने प्रभाव वाले इलाक़ों में किसानों पर 'दस प्रतिशत कर' लगाकर ये धन-राशि एकत्र की है.
कोस्टा का कहना था, "तालेबान को एक प्रकार का टैक्स प्रयोगशालाओं को सुरक्षा दिए जाने के लिए मिलता है और दूसरा सामान, विशेष तौर पर अफ़ीम के सीमापार आने-जाने के लिए दी गई सुरक्षा के लिए...पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान में 8000 टन अफ़ीम का उत्पादन हुआ."
'बिक्री से हथियारों की ख़रीद'
हालाँकि इस साल की फ़सल के बारे में आँकड़े फ़िलहाल जारी होने बाक़ी हैं लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि उत्पादकता और उससे मिलने वाली धन-राशि सूखे और उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में इस फ़सल को उगाने पर लगे प्रतिबंध के कारण पिछले साल के मुक़ाबले कम होगी.
कोस्टा ने बीबीसी को बताया, "पिछले कुछ सालों में विश्व में अफ़ीम की ख़पत लगभग चार हज़ार टन हुई है. स्पष्ट है कि कुल उत्पादन में से काफ़ी बच गया होगा. लेकिन ये कही गुप्त जगहों पर रखी गई है और किसानों के पास नहीं होती."
ब्रितानी अधिकारियों का कहना है कि नशीले पदार्थों की बिक्री से मिलने वाले पैसे से ही तालेबान के सैन्य अभियान चलाए जाते हैं.
क़ाबुल में ब्रितानी दूतावास में नशीले पदार्थों की रोक लगाने वाली शाखा के अध्यक्ष डेविड बेलग्रोव का ज़ोर देकर कहना है कि तालेबान ऐसी बिक्री के मिलने वाले पैसे से ख़ासी तादाद में असला और बारूद ख़रीद रहे हैं.