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मंगलवार, 24 जून, 2008 को 23:35 GMT तक के समाचार

सुबीर भौमिक
बीबीसी के पूर्वोत्तर भारत संवाददाता

संघर्षविराम के मुद्दे पर अल्फ़ा दो फाड़

लगभग तीन दशकों से असम को 'आज़ाद' कराने के लिए हिंसक गतिविधियाँ चला रहे अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ असम यानी अल्फ़ा में विभाजन की स्थिति पैदा हो गई है.

अल्फ़ा की 28वीं बटालियन ने सरकार के साथ संघर्षविराम समझौते पर आगे बढ़ने की औपचारिक घोषणा की है.

यही बटालियन अल्फ़ा की धार है जिसके बूते वह सरकारी प्रतिष्ठानों और सुरक्षाबलों पर हमले करता रहा है.

28वीं बटालियन की ताज़ा पहल पहल से अरबिंद राजखोवा की अगुआई वाला केंद्रीय नेतृत्व और इसके सैनिक विभाग के प्रमुख परेश बरुआ आमने-सामने हो गए हैं.

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बीबीसी को बताया कि उनकी सरकार अल्फ़ा के साथ बातचीत और संघर्षविराम का स्वागत करेगी.

उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा है, इसलिए सरकार अल्फ़ा की 28 वीं बटालियन के साथ संघर्षविराम पर आगे बढ़ेगी.

इस बीच मणिपुर में अलगाववादियों ने चार हिंदीभाषियों की हत्या कर दी है.

सबसे पहले असम में हिंदीभाषियों पर अल्फ़ा ने हमले शुरु किए थे जिनमें 150 से ज़्यादा लोग मारे गए थे लेकिन अब ये हमले मणिपुर में भी हो रहे हैं.