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शुक्रवार, 20 जून, 2008 को 12:08 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

गीलानी की ग़ैर-कश्मीरियों को चेतावनी

भारत प्रशासित कश्मीर में एक महत्वपूर्ण अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गीलानी ने प्रदेश में काम करने वाले ग़ैर-कश्मीरी लोगों को घाटी छोड़कर चले जाने के लिए कहा है.

सर्वदलीय हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता कहे जाने वाले सैयद अली शाह गीलानी ने प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में शुक्रवार को एक विरोध रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ग़ैर-कश्मीरी मज़दूरों को अनेक तरह के अपराधों में लिप्त पाया गया है.

गीलानी ने कहा कि हो सकता है कि श्रीनगर के हब्बा कदल इलाक़े से ग़ायब हुई तीन साल के बच्चे के अपहरण में भी ग़ैर-कश्मीरियों का ही हाथ हो.

मेहरान नामक यह बच्चा कई सप्ताह से लापता है और पुलिस अभी उसका कुछ पता नहीं लगा पाई है.

सैयद अली शाह गीलानी ने बीबीसी से कहा कि उन्होंने ग़ैर-कश्मीर मज़दूरों को घाटी से चले जाने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है, "न तो मैं उनके लिए कोई समय-सीमा तय कर रहा हूँ और न ही मैं उन्हें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा हूँ. उन्हें तो ख़ुद ही कश्मीर घाटी छोड़कर चले जाना चाहिए."

गीलानी ने स्थानीय लोगों से कहा कि "वे ख़ुद ही देखें कि बाहरी मज़दूरों को अपने घरों में किरायेदारों के तौर पर रखने से "कश्मीरी समाज को कितना नुक़सान हो रहा है."

यह दूसरा मौक़ा है जब सैयद अली शाह गीलानी ने ग़ैर-कश्मीरी लोगों को प्रदेश छोड़कर चले जाने के लिए कहा है. गीलानी ने वर्ष 2007 में भी बाहरी लोगों को घाटी छोड़कर चले जाने की चेतावनी दी थी जब एक किशोर लड़की के साथ बलात्कार और फिर उसकी हत्या का मामला सामना आया था.

उस घटना के बाद

हंदवाड़ा में हुई उस घटना के लिए तीन ऐसे मज़दूरों पर आरोप लगाए गए थे जो ग़ैर-कश्मीर थे. गीलानी की चेतावनी के बाद बहुत से ग़ैर-कश्मीरी मज़दूर घाटी छोड़कर चले गए थे जिसकी वजह से ईंट भट्टों जैसे कुछ श्रम क्षेत्रों में मज़दूरों की किल्लत हो गई थी.

उसके बाद गीलानी को अपने रुख़ में कुछ नरमी लानी पड़ी थी और कुछ ग़ैर-कश्मीरी मज़दूर फिर से घाटी में लौट आए थे.

ऐसा अनुमान है कि कश्मीर घाटी में लगभग एक लाख ऐसे मज़दूर काम करते हैं जो मूल रूप से कश्मीरी नहीं हैं. इनमें ज़्यादातर बिहार से आते हैं.

ये मज़दूर कश्मीर घाटी के दूरदराज इलाक़ों में भी काम करते हैं और उनमें ज़्यादातर राजगीर, बढ़ई और इसी तरह के काम करते हैं.

कश्मीर पुलिस ने हाल ही में कुछ ग़ैर-कश्मीरी मज़दूरों को धोखाधड़ी और चोरी जैसे अपराधों में लिप्त पाया था.

सैयद अली शाह गीलानी ने बीबीसी से कहा कि अब ग़ैर-कश्मीरी मज़दूरों के बारे में उनके रुख़ में कोई बदलाव नहीं आएगा.

उनका कहना है कि ग़ैर-कश्मीरी मज़दूर एक ऐसे राज्य से आते हैं जहाँ अपराध तो सामान्य जीवन का एक हिस्सा बन गया है, "अपराध तो उनके ख़ून में रच-बस गया है."