शुक्रवार, 20 जून, 2008 को 12:33 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी के पूर्वोत्तर भारत संवाददाता
भारत के बाढ़ प्रभावित पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, झारखंड, उत्तर प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश राज्यों में पानी में डूबने या मलबे में दबने से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक हो गई है.
अधिकारियों का कहना है कि लगभग 80 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और लगभग बीस लाख लोग बेघर हो गए हैं. हज़ारों गाँव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं.
लगातार तीसरे दिन राज्य सरकारों ने बाढ़ के पानी में फँसे लोगों को बचाने के लिए सेना की मदद ली है और राहत और बचाव कार्यों में ताज़ी लाने की कोशिश की है.
झारखंड ने सेना की मदद माँगी
पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में सेना पहले ही लोगों की मदद करने में जुटी है जबकि झारखंड की सरकार ने भी राहत कार्यों के लिए सेना से और मदद माँगी है.
उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में सेना के हेलीकॉप्टर बाढ़ में फँसे लोगों तक खाने-पीने और ज़रूरत की दूसरी चीज़ें पहुँचा रहे हैं.
लोगों को ऊँची जगहों पर पहुँचाने के काम में नाव और मोटर-बोट को भी लगाया गया है. पीड़ितों तक राहत सामग्री के पैकेट पहुँचाने में भी इनका इस्तेमाल हो रहा है.
सेना के प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन आरके दास ने बीबीसी को बताया कि बड़ी संख्या में सैनिक राहत कार्यों में जुटे हुए हैं.
असम में तबाही
असम के कई इलाक़ों में बाढ़ का पानी फैल गया है और 23 लोग मारे गए हैं. राज्य में कम से कम बीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं.
असम में बाढ़ के कारणों को लेकर राज्य सरकार और एक बिजली कंपनी के बीच बयानबाज़ी भी चल रही है.
असम की सरकार कह रही है कि हताहतों को मुआवज़ा बिजली कंपनी दे. सरकार ने बिजली कंपनी पर बिना चेतावनी के बाँध से ज़्यादा पानी छोड़ने का आरोप लगाया है.
ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ आने के कारण असम में लखीमपुर ज़िला बुरी तरह प्रभावित है और इसके साथ-साथ धेमजी ज़िला भी बाक़ी इलाक़ों से पूरा तरह कटा हुआ है.
अरुणाचल प्रदेश में बारिश के दौरान हुए भूस्खलन में कुछ दिन पहले 14 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें एक ही परिवार के चार लोग शामिल थे.
बंगाल में 40 लाख प्रभावित
पश्चिम बंगाल में बाढ़ से पूर्वी और पश्चिमी मिदनापुर ज़िले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इसमें भी पश्चिमी मिदनापुर की हालत बहुत ज़्यादा गंभीर है.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने पत्रकारों को बताया है कि राज्य में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं और 40 लाख लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. इनमें से पाँच लाख लोगों को 900 अस्थायी राहत शिविरों में जगह दी गई है.
बुद्धदेव ने पत्रकारों को बताया, "पश्चिमी मिदनापुर के सबांग और नारायणगढ़ इलाक़ों में सबसे बुरा असर हुआ है. ज़िले के 822 राहत शिविरों में कम से कम दो लाख लोगों ने शरण ली है."
उड़ीसा में हालत गंभीर
पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के बीच रेल सेवाएँ बाधित हुई हैं और रेल अधिकारियों का कहना है कि इन्हें दोबारा शुरु करने में कम से कम एक हफ़्ते का समय लग सकता है.
उड़ीसा, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी लगभग बीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं.
उड़ीसा की नदियों में जलस्तर तो नीचे उतरा है लेकिन बाढ़ की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. राज्य सरकार के अनुरोध पर वायुसेना के हेलीकॉप्टर प्रभावित इलाक़ों में खाने-पीने का सामान गिरा रहे हैं.
बाढ़ का उड़ीसा के बालासोर, मयूरभंज, भद्रक और जजपुर ज़िलों में सबसे ज़्यादा असर पड़ा है.