गुरुवार, 19 जून, 2008 को 14:45 GMT तक के समाचार
केंद्र में सत्तारुढ़ गठबंधन की अगुआई कर रही कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर कोई भी फ़ैसला सत्ताधारी गठबंधन की पार्टियों को मिलकर लेना होगा.
पिछले कुछ दिनों के दौरान परमाणु समझौते को लेकर गतिविधि तेज़ हुई है लेकिन केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रही वामपंथी पार्टियों ने एक बार फिर अपना विरोध दर्ज किया है.
दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी का कहना है कि परमाणु समझौते पर पार्टी का रुख़ स्पष्ट है.
पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा, "कांग्रेस का मानना है कि परमाणु समझौता देश हित में है और इससे देश में बिजली संकट कम हो सकता है."
हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र में सिर्फ़ कांग्रेस की सरकार नहीं है बल्कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार है. लेकिन उन्होंने परमाणु समझौते के विरोध के लिए वामपंथी दलों की आलोचना की.
समर्थन
इस बीच यूपीए में शामिल राष्ट्रीय जनता दल और द्रमुक ने परमाणु समझौते की पैरवी की है.
राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद ने कहा है कि परमाणु समझौते देश के लिए काफ़ी ज़रूरी है और अगर समझौता नहीं हुआ तो ये बहुत दुर्भाग्यशाली होगा.
गुरुवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने लालू प्रसाद से मुलाक़ात की.
मुलाक़ात के बाद लालू प्रसाद ने कहा कि सरकार को गठबंधन में शामिल दलों को साथ लेकर चलना चाहिए.
लालू प्रसाद ने कहा कि हमें समझौता भी चाहिए और वामपंथी दल भी. वामपंथी दलों की आशंकाओं का ख़ारिज करते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि इस समझौते से हम अमरीका के ग़ुलाम नहीं बन रहे.
यूपीए गठबंधन में शामिल द्रमुक ने भी परमाणु समझौते का समर्थन किया है. पार्टी प्रवक्ता टीकेएस इलैंगोवन ने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी कांग्रेस के साथ है.
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे ये नहीं समझ पा रहे हैं कि परमाणु समझौते को लेकर वाम दलों की आपत्ति क्या है. उन्होंने कहा, "वाम दलों को ये समझना चाहिए कि आज के समय में कोई भी अछूत नहीं है. हमें देश हित के बारे में सोचना चाहिए."
उन्होंने कहा कि कई कम्युनिस्ट देशों ने परमाणु बिजली के लिए अमरीका के साथ समझौता किया है.