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गुरुवार, 19 जून, 2008 को 10:10 GMT तक के समाचार

'कंधार से तालेबान का सफ़ाया'

अफ़ग़ानिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि अफ़ग़ान और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) सैनिकों ने कंधार शहर के बाहरी हिस्सों से तालेबान लड़ाकों को भगा दिया है.

कंधार के गर्वनर असदुल्लाह ख़ालिद ने संवाददाताओं से कहा कि तालेबान लड़ाके अर्ग़न्दाब ज़िले से भाग गए हैं.

उनका कहना है कि इस लड़ाई में बड़ी संख्या में तालेबान के लड़ाके मारे गए हैं. हालाँकि नैटो ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

सुरक्षा बलों और तालेबान लड़ाकों के बीच हुई लड़ाई में अपनी जान बचाने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग अपने घरों से दूर चले गए हैं.

नैटो के प्रवक्ता मार्क लेटी ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि कंधार में सेना का अभियान 'सही तरीक़े और सफलता' के साथ आगे बढ़ रहा है और उसे बहुत कम प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है.

गाँवों पर कब्ज़ा

नैटो के प्रवक्ता ने क़बूल किया कि बुधवार और गुरुवार के बीच की रात इलाक़े में कुछ हवाई हमले किए गए हैं लेकिन उनके पास हताहतों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

हालाँकि गर्वनर ख़ालिद ने कहा, "तालेबान के सैकड़ों लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं और इनमें से ज़्यादातर पाकिस्तानी हैं."

अफ़ग़ान रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से बुधवार को कहा था कि कंधार के पास हवाई हमले में तालेबान के 20 से ज़्यादा लड़ाके मारे गए.

लेकिन इस दावे की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो सकी.

रक्षा मंत्रालय का अनुमान था कि तीन से चार सौ लड़ाकों ने अरगाँधव के कम से कम आठ गाँवों को अपने कब्ज़े में ले लिया है.

सोमवार को दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के कई गाँवों को तालेबान लड़ाकों ने अपने कब्ज़े में कर लिया था. ये गाँव कंधार के नज़दीक अर्ग़न्दाब ज़िले में हैं.

लड़ाई का अखाड़ा

पिछले सप्ताह शुक्रवार को कंधार की जेल से लगभग 350 तालेबान लड़ाके दूसरे क़ैदियों के साथ भाग गए थे. इनमें से कुछ लोगों को ही वापस पकड़ा जा सका.

काबुल से बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंस के मुताबिक़ यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि निशाना बनाए गए लड़ाकों में क्या जेल से भागे तालेबान लड़ाके भी हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ज़्यादातर मदद देश के दक्षिणी हिस्सों से पाने वाले तालेबान के लिए जेल से साथियों को भगाने की घटना बड़ी उपलब्धि थी.

अर्ग़न्दाब कंधार से पाँच किलोमीटर उत्तर है और यह महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र है. इस इलाक़े में अंगूर और अनार के बाग-बगीचों के साथ ही सिंचाई के लिए बनी नालियाँ तालेबान के लड़ाकों को मोर्चा लेने में मददगार साबित होती हैं.

इस समय अफ़ग़ानिस्तान सरकार, नैटो सैनिकों और अमरीका के नेतृत्व वाले गठबंधन के ख़िलाफ़ कंधार विद्रोहियों का सबसे बड़ा अखाड़ा बना हुआ है.

ख़ास बात यह भी है कि कंधार न सिर्फ़ देश के राष्ट्रपति हामिद करज़ई का घर है बल्कि तालेबान का जन्म भी यहीं हुआ था.