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सोमवार, 16 जून, 2008 को 18:45 GMT तक के समाचार

अब्दुल क़दीर ख़ान
पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक

'नक़्शे तो अमरीका, यूरोप से लीक होते हैं'

जिस रिपोर्ट में परमाणु हथियारों के नक़्शे बेचने के आरोप मुझ पर लगाए गए हैं, उसमें कोई हक़ीकत नहीं है.

ये सरकार प्रायोजित एजेंडा है. इसमें अल्ब्राइट और सिमोर हर्ष जैसे यहूदी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं. जब भी अमरीकी सरकार को शरारत करनी होती है तो वे कुछ पत्राकरों को बुला कर उन अख़बारों में बड़ी ख़बरें प्रकाशित कर देते है जो उनके ‘माउथपीस’ की तरह काम करते हैं.

ये जितने नक़्शे वगैरह हैं वो यूरोप और अमरीका से निलकते हैं. आपको शायद पता होगा कि अमरीका के पास डब्ल्यू 88 नाम का बहुत ही छोटा लेकिन बेहद सक्षम हथियार था जिसकी पूरी जानकारी चीन के हाथ लग गई थी.

मेरे बारे में अब ये जीचें चार साल बाद नज़र आ रही है. पहले कहते थे कि मैं घर में क़ैद हूँ, कमरे में हूँ, बाथरूम में बैठा हूँ अब नई बात सामने आ गई.

दूसरी बात मैं आपको बताना चाहूँगा कि पाकिस्तान ने पहला परमाणु हथियार बनाया था 1983-84 में. उसमें हमने कोई तब्दीली नहीं की. अगर इन्हें कोई चीज मिली और अब दावा कर रहे हैं कि वो छोटा है, बड़ा है तो ये सब बकवास है.

हमने साधारण बम बनाया है जो अच्छा काम करता है. वर्ष 2001 तक यही स्थिति थी जब मैंने छोड़ा था. बाद में कोई बदलाव हुआ हो तो मैं नहीं जानता.

सभ्यता को ख़तर

हम तो अमरीकियों के लिए लानत बन गए हैं. दो ही आदमी हैं इनके लिए जो इनकी नींद उड़ाते हैं. एक ओसामा बिन लादेन और एक मैं हूँ. इनको हर चीज में लादेन नज़र आता है और मैं नज़र आता हूं जबकि इन सबसे मेरा कोई ताल्लुक नहीं है.

जब से इस्लाम आया है उनकी सभ्यता को किसी और सभ्यता से ख़तरा नहीं हुआ सिवाए मुसलमानों से.

आज भी धर्म परिवर्तन इस्लाम में ज़्यादा हो रहा है. अभी पोप ने कहा कि मुसलमान इसाई से ज़्यादा बढ़ गए हैं. तो उन्हें ख़तरा लगा हुआ है.

उनकी सभ्यता तो दिवालिया हो गई है. जिस तहजीब में मर्दों को मर्दों से शादी की इजाज़त है और समलैंगिकों को प्रोत्साहित किया जाए वो भी कोई सभ्यता है.

(बीबीसी संवाददाता अनीश अहलूवालिया के सथ बातचीत पर आधारित)