शनिवार, 14 जून, 2008 को 11:00 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में नवंबर 2007 में बर्ख़ास्त किए गए जजों की बहाली को लेकर इस्लामाबाद में हुई वकीलों की रैली में ग़ुस्सा राष्ट्रपति परवेज़ पर उतरता नज़र आया है.
पाकिस्तान मुस्लिम लीग के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने वकीलों की रैली को संबोधित करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को उनके 'अपराधों' की सज़ा मिलनी चाहिए.
बर्ख़ास्त जजों की बहाली को लेकर देश भर से भारी संख्या में इस्लामाबाद में जुटे वकीलों की रैली शनिवार तड़के ख़त्म हुई जिसमें कुछ वकीलों का कहना था कि मौजूदा सरकार इस बारे में कुछ नहीं कर पाई है.
ध्यान रहे कि फ़रवरी 2008 में हुए चुनावों के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व में जो गठबंधन सरकार बनी थी उसने बर्ख़ास्त जजों को एक महीने के भीतर बहाल करने का वादा किया था लेकिन वकीलों का कहना है कि अभी तक इस बारे में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.
इस सरकार को नवाज़ शरीफ़ की मुस्लिम लीग का भी समर्थन हासिल है और सरकार ने 30 अप्रैल 2008 तक जजों को बहाल करने का वादा किया था लेकिन पीपीपी और मुस्लिम लीग में इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनने की वजह से कोई क़दम नहीं उठाया गया.
बाद में नवाज़ शरीफ़ ने मई के प्रथम सप्ताह में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार में शामिल राजनीतिक दलों में इस मुद्दे पर सहमति बन गई है और 12 मई 2008 को जजों की बहाली के बारे में अधिसूचना जारी कर दी जाएगी लेकिन वह समय सीमा गुज़रने के बाद भी कुछ नहीं किया गया.
रैली को मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के एतहतेजाज़ अहसन के अलावा कई नेताओं ने संबोधित किया.
हालाँकि एक वरिष्ट वकील और लाहौर बार एसोसिएशन की अध्यक्ष राबिया बाजवा कह चुकी हैं कि जजों की बहाली के बारे में मौजूदा सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि रैली को मुशर्रफ़ के विरोध का रुख़ दे दिया गया है.
नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि संविधान से खिलवाड़ और 1999 में उनकी सरकार के तख़्तापलट के लिए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए, "हमने आपसे (मुशर्रफ़) चुनाव के बाद पद छोड़ने को कहा लेकिन आपने ऐसा नहीं किया. अब लोगों ने आपके लिए नया फ़ैसला दिया है. वे आपको ज़िम्मेदार ठहराना चाहते हैं."
उग्र हुए वकील
जब शीरफ़ भाषण दे रहे थे उस समय भीड़ में से कुछ लोगों ने 'मुशर्रफ़ को फाँसी दो' के नारे लगा रहे थे.
पूर्व प्रधानमंत्री ने सवालिया लहज़े में कहा, "क्या फाँसियाँ सिर्फ़ सियासतदानों के लिए होती हैं? इन ख़ून चूसने वाले तानाशाहों को भी ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए."
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की अगुआई में बनी सरकार पीएमएल (एन) के समर्थन पर टिकी है.
पीएमएल (एन) ने सरकार गठन के लिए हुए समझौते के दौरान ही ये माँग रखी थी कि नई सरकार बर्ख़ास्त जजों की बहाली का फ़ैसला करेगी.
सरकार पर दबाव डालने के लिए नवाज़ शरीफ़ ने कुछ दिनों पहले केंद्रीय कैबिनेट से अपनी पार्टी के मंत्रियों को हटा लिया था.
विश्लेषकों का कहना है कि इस ताज़ा रैली से सरकार पर दबाव बढ़ेगा. रविवार से संसद की कार्यवाही शुरू हो रही है और इसमें इन माँगों पर ज़बरदस्त हंगामा हो सकता है.