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शनिवार, 14 जून, 2008 को 12:51 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

बातचीत का ब्यौरा बैंसला को देंगे वार्ताकार

राजस्थान में अनुसूजित जनजाति का दर्जा माँग रहे गूजरों और राजस्थान सरकार के वार्ताकारों के बीच तीसरे दौर की बातचीत ख़त्म हो गई है.

बातचीत का क्या नतीजा निकला, यह बताने से गूजर वार्ताकारों ने फ़िलहाल इनकार कर दिया है.

गूजरों की तरफ़ से वार्ता में हिस्सा लेने वाले 28 में से चार वार्ताकार बातचीत का नतीजा गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को बताने पीलूपुरा जा रहे हैं.

इस बीच राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक और कुछ समय पहले तक मंत्री रहे डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.

उन्होंने अपने आवास पर पत्रकारों के सामने इसकी आशंका जताई कि राज्य सरकार गूजरों की बात मान सकती है और उनके इस्तीफ़े के कारणों में यह सबसे ऊपर है.

गूजरों की माँग

राज्य सरकार के दो मंत्रियों के साथ बयाना में पहले दौर की वार्ता के बाद गूजर दूसरे दौर की वार्ता जयपुर में करने के लिए तैयार हुए थे.

शुक्रवार को दूसरे दौर की वार्ता हुई थी लेकिन उसमें कोई नतीजा नहीं निकला और दोनों पक्षों ने तय किया था कि शनिवार को बातचीत का तीसरा दौर होगा.

वार्ता में गूजरों की तरफ़ से 28 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं जिनकी अगुवाई भारत प्रशासित कश्मीर के गूजर नेता मसूद चौधरी कर रहे हैं.

राजस्थान सरकार के नौ वार्ताकार भारतीय जनता पार्टी के नेता रामदास अग्रवाल के नेतृत्व में गूजरों से बातचीत कर रहे हैं.

सरकारी वार्ताकारों में राजस्थान सरकार में गूजर समुदाय के दो मंत्री भी शामिल हैं.

तीसरे दौर की वार्ता के बाद मसूद चौधरी ने कहा कि हमने राज्य सरकार के सामने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने, आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी देने, घायलों की आर्थिक सहायता करने और गिरफ़्तार आंदोलनकारियों की रिहाई की माँग रखी है.

जब पत्रकारों ने चौधरी से यह पूछा कि इन मसलों पर सरकार ने क्या कहा तो उन्होंने कहा कि वे वार्ता के परिणाम के बारे में अभी नहीं बता सकते.

चौधरी ने कहा कि उनके चार वार्ताकार पीलूपुरा जा रहे हैं जहाँ वे गूजर आरक्षण संघर्ष समिति के नेता बैंसला से मिलकर उन्हें बातचीत के बारे में बताएँगे.

मीणा विधायक का इस्तीफ़ा

राजस्थान का मीणा समुदाय आम तौर पर गूजरों को अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण देने के ख़िलाफ़ है.

किरोड़ी लाल मीणा ने इन्हीं कारणों से कुछ समय पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था.

अब उन्होंने राज्य विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने अपना त्यागपत्र विधानसभा के अध्यक्ष को भेज दिया है.

मीणा ने पत्रकारों से कहा कि राज्य सरकार गूजरों की माँग मान सकती है और उन्होंने इसके ख़िलाफ़ में इस्तीफ़ा दिया है.

उनकी तकलीफ़ इन शब्दों में झलकी," आप 28 गूजर प्रतिनिधियों से बात कर रहे हैं. गूजर के दो मंत्री भी वार्ता में शामिल हैं लेकिन आप हमसे कोई बात ही नहीं कर रहे हैं."

उन्होंने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह गूजरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था महाराष्ट्र राज्य की तर्ज पर करे.

मीणा कहते हैं, "आप उन्हें कानूनन आरक्षण नहीं दे सकते तो 1999 में आई केंद्र की चिट्ठी का हवाला देकर जनजाति में शामिल करने की बात कहना छलावा है."