शुक्रवार, 13 जून, 2008 को 17:36 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर मंगलवार को हुए हवाई हमले की जाँच में शामिल होने के अमरीकी न्यौते का पाकिस्तान ने स्वागत किया है.
अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने इस हमले की जाँच में शामिल होने के लिए पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान दोनों को आमंत्रित किया था.
पाकिस्तान का कहना है कि इस हमले में 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई थी.
पाकिस्तान ने इस हमले की भर्त्सना की थी.
हालांकि अमरीकी विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए खेद जताया था लेकिन रक्षा मंत्रालय ने उस हमले को जायज़ ठहराया था.
इसके बाद अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा था कि अमरीका इस हमले की जाँच कर रहा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद क़ुरैशी ने इस जाँच में शामिल होने के लिए पाकिस्तान को आमंत्रित करने का स्वागत किया है.
क़ुरैशी ने पेरिस में अमरीकी विदेशमंत्री कोंडोलीज़ा राइस से मुलाक़ात से पहले यह बयान दिया.
कूटनीतिक संबंध
अमरीका के रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने ब्रसेल्स में कहा कि उन्होंने अफ़ग़ान और पाकिस्तानी अधिकारियों को जाँच में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है.
रॉबर्ट गेट्स ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नैटो की एक बैठक को संबोधित करते हुए कि उन्हें अफ़सोस है कि इस घटना की वजह से अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में कुछ तनाव पैदा हो गया है.
अमरीका ने कहा था कि उन्होंने उस हवाई हमले में नैटो गठबंधन का विरोध करने वाले लड़ाकों के ठिकानों को निशाना बनाया था जो पाकिस्तानी क्षेत्र में है.
पाकिस्तानी अधिकारियों ने उस हमले की भर्त्सना की थी.
बीबीसी संवाददाता निक चाइल्ड का कहना है कि उस हमले के बारे में उपलब्ध जानकारी विवादास्पद है लेकिन इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि इस हमले की वजह से अमरीका और पाकिस्तान के पहले से ही जटिल और संवेदनशील संबंधों को और कड़वा कर दिया है.
रॉबर्ट गेट्स की यह ताज़ा टिप्पणी से स्पष्ट झलकता है कि वह अमरीका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंधों को और बिगड़ने से बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान को अमरीका का असाधारण रूप से एक भरोसेमंद सहयोगी क़रार दिया है.
वीडियो से सवाल
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का मानना है कि अफ़ग़ान-पाकिस्तान सीमा पर किया गया उसका हवाई हमला सही था और उसमें सटीक प्रक्रिया का अनुसरण किया गया लेकिन अमरीका ने उस हमले का जो आंशिक वीडियो जारी किया उसने अनेक सवालों के जवाब देने के बजाय कुछ और सवाल खड़े कर दिए हैं.
अमरीका का कहना है कि उसने लड़ाकों के ठिकानों पर तोपखानों का इस्तेमाल किया और बी-1 बमवर्षक विमान और दो एफ़-15 विमानों से 13 बम भी गिराए.
उसका यह भी कहना है कि यह हमला दरअसल उन लड़ाकों के ठिकानों पर किया गया जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद कुछ पश्चिमी देशों के सैनिकों पर गोलीबारी की थी.
उधर पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि अमरीका जो कह रहा है, दरअसल ऐसा नहीं हुआ और उस हमले में पाकिस्तान के 11 सैनिक मारे गए.
हालाँकि इस तरह की घटनाएँ पहले भी हो चुकी हैं लेकिन इस ताज़ा घटना ने अमरीका और पाकिस्तान के कूटनीतिक संबंधों को गंभीर दौर में ला खड़ा किया है और वो भी ऐसे समय में जब अमरीकी और नैटो सेनाओं में यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि तालेबान लड़ाकों को पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में पनाह मिल रही है.
अमरीका पाकिस्तान की नई सरकार के साथ एक ठोस दोस्ती के संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है और अमरीका को पाकिस्तान की नई सरकार की इस पहल पर भी कुछ परेशानी हो रही है कि वह सीमावर्ती इलाक़ों में लोगों को ख़ुश करने की कोशिश कर रही है.
पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा स्थिति के बारे में भी पश्चिमी देशों को अब भी चिंताएँ हैं लेकिन पाकिस्तान में अमरीका के साथ संबंधों को लेकर भी उत्सुकताएँ और चिंताएँ देखने को मिल रही हैं.
गत मंगलवार को हुए अमरीकी हवाई हमले से जो विवाद पैदा हुआ है, उसे दूर करना मुश्किल हो सकता है और साथ ही सीमा पर तैनात पाकिस्तानी सैनिक इस घटना के बारे में क्या राय बनाते हैं.