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शुक्रवार, 13 जून, 2008 को 16:12 GMT तक के समाचार

इस्लामाबाद में वकीलों का जमावड़ा

पाकिस्तान में जजों की बहाली की मांग को लेकर देशभर के हज़ारों वकील शुक्रवार को राजधानी इस्लामाबाद पहुँचकर रैली निकालने के लिए संसद भवन के बाहर इकट्ठा हुए हैं.

इन वकीलों ने गुरुवार की रात लाहौर से गाड़ियों की एक रैली के रूप में मार्च शुरू किया था और शुक्रवार रात तक वे इस्लामाबाद पहुँच गए.

इससे पहले वकीलों ने देशव्यापी प्रदर्शन किए. वकीलों के जमावड़े को देखते हुए इस्लामाबाद में संसद भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है लेकिन पाकिस्तान की नई सरकार ने पुलिस को आदेश दिया है कि वह प्रदर्शनकारियों के साथ सहयोग करे.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने नवंबर 2007 में लगभग 60 जजों को निलंबित कर दिया था. इसमें मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी भी शामिल हैं.

इस फ़ैसले का वकीलों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया था लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि नई सरकार बनने के बाद भी वकीलों की बहाली के लिए कुछ फ़ैसला नहीं किया गया है.

फ़रवरी 2008 के चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों ने वादा किया कि इन वकीलों को फिर से बहाल किया जाएगा.

देश की बागडोर संभालने के लिए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग (नवाज़) के बीच जो गठबंधन हुआ उसमें भी जजों की फ़ौरन बहाली को प्रमुखता दी गई.

पर तीन महीने गुज़र जाने के बाद भी अभी तक यह नहीं किया जा सका है जिसे लेकर पाकिस्तान के वकीलों में व्यापक रोष है.

एक वरिष्ठ वकील और लाहौर बार एसोसिएशन की अध्यक्ष राबिया बाजवा ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि राजनीतिक दलों ने अपना वादा पूरा नहीं किया है और उन्हें यही वादा पूरा करने की याद दिलाने के लिए संसद भवन के सामने यह रैली की जा रही है.

राबिया बाजवा ने कहा, "वकीलों ने नई सरकार को सत्ता संभालने के बाद एक महीने का समय दिया था लेकिन इतना समय गुज़रने के बाद भी कुछ नहीं किया गया है जबकि संसद सिर्फ़ कुछ ही मिनटों में एक प्रस्ताव पारित करके जजों को बहाल करने का आदेश दे सकती है."

राबिया बाजवा ने कहा कि ख़ासतौर से इस मामले में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने वकीलों को बहुत निराश किया है.

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एहतेजाज अहसन ने कहा कि प्रदर्शनकारी वकील इस्लामाबाद में रैली करने के दौरान ही अपनी अगल रणनीति की घोषणा करेंगे.

विरोध-प्रदर्शन

वकील माँग कर रहे हैं कि नवंबर 2007 में हटाए गए वकीलों की तत्काल बहाल किया जाए.

लाहौर से इस्लामाबाद का फ़ासला क़रीब 270 किलोमीटर का है. इस यात्रा के दौरान वकीलों का जत्था कई शहरों, कस्बों, इलाकों से होकर गुजरता हुआ शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुँचा.

वकीलों का यह समूह वाहनों पर सवार होकर राजधानी की ओर बढ़ा और इसने एक रैली की शक्ल अख़्तियार कर ली.

वकीलों के इस मार्च का समर्थन कुछ ग़ैरराजनीतिक संगठन और राजनीतिक दल भी कर रहे हैं.

वैसे इस्लामाबाद पहुँचने वाला वकीलों का यह प्रदर्शन मार्च वर्तमान सरकार के लिए भी एक चुनौती होगा क्योंकि सबकी नज़र इस बात पर होगी कि वकीलों की बहाली का वादा करने वाली सरकार वकीलों के प्रदर्शन के साथ क्या बर्ताव करती है और उनकी माँग पर क्या क़दम उठाती है.