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बुधवार, 11 जून, 2008 को 16:14 GMT तक के समाचार

राजा लोकहित के लिए काम करेंगे

नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने कहा है कि शाही महल छोड़ने के बाद वह देश छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और देश में ही रहकर आम लोगों की भलाई के लिए काम करेंगे.

राजा ज्ञानेंद्र बुधवार को काठमांडू में स्थित शाही महल को छोड़ रहे हैं और इसके बाद वे राजधानी के बाहरी इलाक़े में एक घर में रहेंगे जो उनका निजी मकान है जिसका नाम नागार्जुन महल है.

नेपाली राजशाही काठमांडू स्थित नारायणहीती नामक इस शाही महल में पिछले 200 साल से रहती रही है.

बुधवार को महल छोड़ने से पहले राजा ज्ञानेंद्र ने कहा है, "देश छोड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है और देश में रहकर ही नेपाली राष्ट्र की स्वतंत्रता और समृद्धि के लिए काम करना है."

नारायणहीती शाही महल में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने कहा कि उन्होंने अपना ताज और अन्य शाही सामान नेपाल सरकार को सौंप दिया है.

इस संवाददाता सम्मेलन में ज्ञानेंद्र ने कहा, "अगर अतीत में मेरे या मेरे परिवार की किसी गतिविधि से किसी को कोई नुक़सान पहुँचा हो या किसी के अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो तो हमें उम्मीद है कि सब इस वास्तविकता को समझने की कोशिश करेंगे कि ऐसा अनजाने में हुआ होगा."

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने संवाददाता सम्मेलन में एक लिखित बयान पढ़ते हुए कहा कि शाही महल में जून 2001 में हुआ नरसंहार उनके और उनकी परिवार की छवि के लिए बहुत ही विध्वंसकारी रहा है और उनके ख़ुद के शरीर और उनकी पत्नी और पूर्व साम्राज्ञी कोमल के शरीर में अब भी गोलियों के छर्रे मौजूद हैं.

18वीं सदी में नेपाली राजशाही की स्थापना करने वाले राजा पृथ्वी नारायण शाह के योगदान का ज़िक्र करते हुए कहा, "राजशाही हमेशा ही नेपाली लोगों की दोस्त बनकर रही है" और वह ख़ुद भी नेपाली लोगों की भलाई चाहते थे.

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने इन दावों का खंडन किया कि उन्होंने अपनी कुछ संपत्ति विदेशों में रखी हुई है. पूर्व राजा ने कहा कि उनकी जो भी कुछ संपत्ति है वह नेपाल में ही है.

राजशाही का उन्मूलन

पिछले महीने की 12 तारीख़ को नेपाल की नव निर्वाचित संविधान सभा ने नेपाल को गणतंत्र घोषित किया था और नेपाल में लगभग 240 साल तक चले शाह राजवंश का शासन अंत हो गया था.

पंद्रह दिन पहले पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र को शाही महल छोड़ने का निर्देश दिया गया था.

नेपाल के गृहमंत्री कृष्ण प्रसाद सितौला के मुताबिक़ पूर्व नरेश अपने साथ क्या-क्या ले जाएँगे और क्या-क्या महल में ही रह जाएगा, इसकी जानकारी बाद में सार्वजनिक की जाएगी.

माओवादी नेता पहले ही कह चुके हैं कि शाही महल को एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया जाएगा.

माओवादियों के प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महार का कहना था, "यह एक बहुत ही सकारात्मक कदम है कि पूर्व नरेश ने शांतिपूर्ण ढंग से राजमहल खाली करने का फ़ैसला किया है. हम उनका धन्यवाद करते हैं."

नेपाल के समाचार पत्रों में ख़बर है कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की सौतेली माँ और उनकी दादी को मध्य काठमांडू के राजमहल परिसर में रहने दिया जाएगा लेकिन इस जगह और मुख्य महल के बीच बाड़ लगा दी जाएगी.