बुधवार, 11 जून, 2008 को 08:57 GMT तक के समाचार
तेल क़ीमतें बढ़ाने के विरोध में भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में निजी बस ऑपरेटरों की बेमियादी हड़ताल का गहरा असर हुआ है.
जम्मू के वैष्णोदेवी मंदिर गए तीर्थयात्रियों की वापसी में बाधा पैदा हो रही है क्योंकि पचास हज़ार यात्री वाहन सोमवार को शुरू हुई हड़ताल के बाद सड़क पर नहीं उतरे हैं.
वहीं भारत प्रशासित कश्मीर घाटी में कारोबारियों ने तेल पर बिक्री कर में कटौती कर मूल्य वृद्धि का असर कम करने की माँग को लेकर बुधवार को बंद बुलाया हुआ है.
घाटी में बंद की अपील कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैन्यूफैक्चरर्स फ़ेडरेशन ने की है जो अमरनाथ मंदिर प्रबंध समिति को वन भूमि देने के फ़ैसले का भी विरोध कर रहा है.
केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही पेट्रोल में पाँच और डीज़ल में तीन रुपए प्रति लीटर और गैस में पचास रुपए प्रति सिलेंडर की वृद्धि की है जिसका देश में कई जगह विरोध हो रहा है.
फँसे हुए यात्री
जम्मू से बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी ने ख़बर दी है कि बस ऑपरटेरों की हड़ताल के तीन दिन हो चुके हैं जिसका जनजीवन पर गहरा असर हुआ है.
जाड़े के मौसम में राज्य की राजधानी रहने वाले जम्मू शहर में स्थानीय यात्रियों के अलावा इस मौसम में वैष्णोदेवी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पूरे देश से तीर्थयात्री आते हैं.
यात्री वाहनों की हड़ताल का असर दफ़्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति पर भी हुआ है.
राज्य सरकार ने हड़ताल के कारण फँसे यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों को लगाया है.
जम्मू डिविज़न के आयुक्त सुधांशु पांडेय ने बीबीसी बताया, "ट्रेन से जम्मू पहुँच रहे तीर्थयात्रियों और वैष्णोदेवी यात्रा के आधार शिविर कटरा में फँसे यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है."
उन्होंने कहा, "परिवहन निगम की बसों ने यात्रियों को गंतव्य तक पहुँचाया है और इस समय जम्मू रेलवे स्टेशन या कटरा आधार शिविर पर कोई यात्री फँसा हुआ नहीं है."
सरकार से बातचीत
पांडेय ने माना कि संपर्क सड़कों पर सफ़र करने वाले परेशानी का सामना कर रहे हैं क्योंकि इन पर सवारी गाड़ियाँ कम संख्या में चल रही हैं.
सरकार के पास कम बसें हैं इसलिए बड़ी संख्या में फँसे यात्रियों को लादने में क्षमता का ख़्याल नहीं रखा जा रहा है.
एक अधेड़ उम्र के तीर्थयात्री अशोक कोठारी ने पाँच लोगों के अपने परिवार के साथ वैष्णोदेवी का दर्शन कर लौटते समय बीनू जोशी को बताया, "हड़ताल के कारण परेशानी हुई है क्योंकि सरकारी बस में क्षमता से दोगुने लोग ढोए जा रहे हैं."
वाहनों की कमी का फ़ायदा उठाकर ट्रेवल एजेंसियाँ मनमाना किराया वसूल रही हैं.
जम्मू स्टेशन पर दिल्ली के रमेश वोहरा मिले जो दर्शन कर लौट रहे थे. उन्होंने बताया, "हमने कटरा जाने और वापस जम्मू आने के लिए तिगुना किराया दिया."
पानीटोप या कश्मीर जा रहे पर्यटकों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
बस ऑपरेटर इस आधार पर किराया को 50 फ़ीसदी बढ़ाने की माँग कर रहे हैं कि वर्ष 2005 के बाद से इसे नहीं बढ़ाया गया है जबकि ईंधन और पार्ट-पुर्जें की क़ीमतें बहुत बढ़ चुकी हैं.
आयुक्त सुधांशु पांडेय ने बताया, "ट्रांसपोर्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल सरकार के प्रतिनिधियों से बात करने के लिए श्रीनगर गया है. हमें कुछ समाधान की उम्मीद है."
कारोबारियों की हड़ताल
श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन ने बताया है कि भारत प्रशासित कश्मीर घाटी में बुधवार को कारोबारी हड़ताल पर चल रहे हैं.
उनकी माँग है कि दूसरे भारतीय राज्यों की तरह यहाँ की सरकार भी बिक्री कर में कटौती करे ताकि आम लोगों पर तेल की बढ़ाई गई क़ीमतों का असर कम हो सके.
कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैन्यूफैक्चरर्स फ़ेडरेशन अमरनाथ मंदिर प्रबंध समिति को जंगल की ज़मीन देने का भी विरोध कर रहा है जिस पर मंदिर प्रबंधन तीर्थयात्रियों के लिए अस्थायी तौर पर कुछ झोंपड़ी और शौचालय बनाना चाहता है.
यहाँ तक कि इस मसले पर सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख घटक पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीपी) ने भी ज़मीन देने का विरोध किया है.
विपक्षी पार्टी नेशनल काँफ्रेंस के अध्यक्ष उमर अबदुल्ला ने भी सरकार के इस क़दम का विरोध किया है.
उनका कहना है, "हम चाहते हैं कि इस बात का स्वतंत्र अध्ययन करवाया जाए कि मंदिर प्रबंधन जो बनाना चाहता है उसका पर्यावरण पर क्या असर होगा."