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बुधवार, 11 जून, 2008 को 07:21 GMT तक के समाचार

सुशील झा,
बीबीसी संवाददाता, मुंबई

मुंबई, बारिश और अमरीका...

मुंबई की बारिश पर पूरे भारत की नज़र तो रहती ही है लेकिन अब अमरीका की नज़र भी मुंबई की बारिश पर रहने लगी है और इस बात से बीएमसी यानी वृहन्नमुंबई नगरपालिका काफ़ी परेशान दिख रही है.

हुआ यह है कि अमरीकी वाणिज्य दूतावास ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वो मानसून के समय मुंबई न जाएँ.

यहाँ तक तो ठीक है. लेकिन दूतावास की सलाह में यह भी लिखा हुआ है कि 'बीएमसी बाढ़ की स्थिति में सड़कों पर बने मैनहोल्स खोल देती है ताकि पानी नालों में चला जाए और ऐसी स्थिति में लोगों के इन गड्ढों में गिरने की संभावना रहती है.'

इसमें यह भी कहा गया है कि 'बीएमसी इन मैनहोल्स के ढक्कन हटाने की जगहों पर चेतावनी नहीं देता' और साथ ही मुंबई में कई स्थानों पर पैदल चलने के लिए रास्ता ही नहीं है.

ज़ाहिर है कि इससे बीएमसी की साख को और मुंबई की साख को भी धक्का पहुँचा है.

बीएमसी ने प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई और इसका खंडन किया.

'सलाह अमरीका पर भी संभव है'

प्रेस कान्फ़्रेंस के दौरान बीएमसी के कमिश्नर जयराज फाटक तमतमाए दिखे और बीबीसी का माइक देखते ही आनन-फ़ानन में उठकर चल दिए.

बाद में फ़ोन पर उन्होंने बड़े नाराज़गी भरे स्वर में कहा कि लोगों ने बयान देखे बिना सवाल किए लेकिन जब बयान पढ़कर सुनाया गया तो बोले कि इसका कोई महत्व नहीं है.

उनका कहना था, मेरे संबंधी भी अमरीका जाएँगे तो मैं भी सलाह दे सकता हूँ कि अमरीका के विस्कॉंसिन में बाढ़ आई हुई है.

प्रेस कान्फ्रेंस में बीएमसी ने अमरीका के विस्कोंसिन में आई बाढ़ से जुड़ी ख़बरें भी प्रसारित कीं.

लेकिन जब जयराज फाटक के पूछा गया कि क्या दूसरों की ग़लतियाँ गिनाने से अपनी ग़लतियाँ कम हो जाती हैं, तो इसका जवाब उन्होंने नहीं दिया. लेकिन एक अन्य अधिकारी का कहना था कि बीएमसी जब भी मैनहोल्स खोलती है तो वहाँ चेतावनी लगाई जाती है.

मुंबई के लोगों को शायद ये बात हज़म न हो क्योंकि ऐसी चेतावनियाँ कम ही देखी गई हैं.

बीएमसी के अधिकारी कहते हैं कि अमरीका की यात्रा सलाह से मुंबई की छवि ख़राब हुई है लेकिन वो अपनी 'ग़लतियाँ' मानते कतई दिखाई नहीं पड़ते.