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बुधवार, 11 जून, 2008 को 11:18 GMT तक के समाचार

शेख़ हसीना इलाज के लिए आज़ाद

बांग्लादेश की विपक्षी नेता और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख़ हसीना को विदेश में इलाज कराने के लिए रिहा कर दिया गया है.

बांग्लादेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को भ्रष्टाचार के आरोपों में पिछले कुछ दिनों से गिरफ़्तार किया हुआ था और अब अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इलाज के लिए आठ सप्ताह के लिए पैरोल पर रिहा किया गया है.

संभावना है कि शेख़ हसीना बुधवार को पैरोल पर रिहा होने के बाद गुरूवार को इलाज के लिए अमरीका के लिए रवाना होंगी.

शेख़ हसीना उन अनेक राजनेताओं में से एक हैं जिन्हें बांग्लादेश की मौजूदा सेना समर्थित सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद कर रखा है.

बताया जा रहा है कि शेख़ हसीना अपने कान, आँख और रक्त से संबंधित समस्याओं का इलाज अमरीका में कराएंगे. उनके बच्चे अमरीका में ही रहते हैं.

बढ़ती बीमारियाँ

अवामी लीग की नेता और बांग्लादेश के संस्थापक कहे जाने वाले शेख़ मुजीबुर्रहमान की बेटी शेख़ हसीना को संसद परिसर में बनी एक विशेष जेल में रखा गया था और जब बुधवार को उन्हें रिहा किया गया तो वह केंद्रीय ढाका में अपने घर के लिए रवाना हो गईं.

अवामी लीग के एक वरिष्ठ नेता ने बीबीसी को बताया कि पार्टी की नेता की बीमारियाँ पिछले कुछ समय से बहुत बढ़ने लगी तीं, ख़ासतौर से जब उन्हें क़रीब एक साल पहले जेल में बंद किया गया था.

शेख़ हसीना के डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें बांग्लादेश में समुचित इलाज नहीं मिल सकता है.

ढाका में बीबीसी संवाददाता मार्क डमेट का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शेख़ हसीना की हालत कितनी गंभीर है और इलाज कितने दिन चलेगा. यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या वह दिसंबर 2008 में प्रस्तावित चुनावों से पहले स्वदेश लौटेंगी या नहीं.

बांग्लादेश की सेना समर्थित सरकार ने अप्रैल 2008 में शेख़ हसीना की स्वदेश वापसी को रोकने की कोशिश की थी जब वह एक निजी दौरे पर विदेश गई थीं और बांग्लादेश लौट रही थीं.

हालाँकि सेना समर्थित सरकार ने शेख़ हसीना को बांग्लादेश में दाख़िल होने की इजाज़त दे दी थी लेकिन कुछ ही दिन बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था.

बांग्लादेश सरकार ने एक अन्य विपक्षी नेता और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष ख़ालिदा ज़िया को भी देश से निकालने की कोशिश की थी लेकिन वह वहीं रहीं और बाद में उन्हें भी जेल में भेज दिया गया.

ख़ालिदा ज़िया को भी इलाज के लिए विदेश जाने की पेशकश की गई थी लेकिन उन्होंने सरकार की इस पेशकश को ठुकरा दिया था.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार का मानना है कि देश में राजनीतिक संस्थानों में सुधार की प्रक्रिया तब तक कामयाब नहीं होगी जब तक कि ये दोनों क़द्दावर राजनीतिक नेता देश में मौजूद रहेंगी.

लेकिन ये दोनों महिला नेता अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार करते हैं.