मंगलवार, 10 जून, 2008 को 05:51 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में जजों की बहाली की मांग को लेकर देशभर के वकीलों ने राजधानी इस्लामाबाद की ओर देशव्यापी मार्च शुरू कर दिया है.
ये प्रदर्शनकारी शुक्रवार को इस्लामाबाद में जमा होंगे.
कराची से बड़ी संख्या में वाहनों में भरकर प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाते हुए रवाना हुए.
इसी तरह सिंध, बलूचिस्तान और पंजाब प्रांतों से लोग रवाना हुए. ये लोग मंगलवार को मुल्तान में जमा हो रहे हैं जहाँ से वे इस्लामाबाद को रवाना होंगे.
सिंध के बर्ख़ास्त जज सबीहुद्दीन अहमद ने कराची में लोगों को संबोधित कर कहा कि सोमवार 'ऐतिहासिक' दिन है. उनका कहना था कि जज देश और संविधान को बचाने के लिए आगे आए थे.
बीबीसी संवाददाता का कहना था कि ये प्रदर्शनकारी 'मुशर्रफ़ जाओ,जाओ' के नारे लगा रहे थे.
ये वकील राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को हटाए जाने की भी मांग कर रहे हैं.
वकीलों के इस मार्च का समर्थन कुछ ग़ैरराजनीतिक संगठन और राजनीतिक दल भी कर रहे हैं.
बहाली का आंदोलन
माना जा रहा है कि ये मार्च पाकिस्तान की नई सरकार के लिए भी एक इम्तिहान होगा.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में गठबंधन सरकार के गठन के दौरान तय हुआ था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जिन जजों को बर्ख़ास्त किया था, उनको अप्रैल के अंत तक बहाल कर दिया जाएगा.
इसके बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता आसिफ़ ज़रदारी और मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता नवाज़ शरीफ़ के बीच इसको लेकर कई दौर की बातचीत हुई थी लेकिन जजों की बहाली पर सहमति नहीं हो पाई.
इसके बाद नवाज़ शरीफ़ ने अपने समर्थकों को गठबंधन सरकार से अलग होने के लिए कह दिया था.
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने नवंबर, 2007 में लगभग 60 जजों को निलंबित कर दिया था. इसमें मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी भी शामिल हैं.
प्रेक्षकों का कहना है कि इन जजों का पद पर रहना परवेज़ मुशर्रफ़ को असुविधाजनक लग रहा था और उनका ख़याल था कि ये जज उनके शासन के ख़िलाफ़ क़ानूनी अड़चनें पैदा करेंगे.
लेकिन चुनावों में जजों की बर्ख़ास्तगी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था.