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नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

गूजरों और सरकार के बीच रस्साकशी

गूजर आंदोलनकारियों और राजस्थान सरकार के बीच रस्साकशी जारी है. दोनों पक्षों की बयाना में हुई पहले दौर की बातचीत के बाद फिर गतिरोध उत्पन्न होने की आशंका है.

गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने माँग की है कि गिरफ़्तार आंदोलनकारी महिलाओं को तत्काल रिहा किया जाए. ग़ौरतलब है कि लगभग 25 आंदोलनकारी गूजर महिलाएँ जेल में बंद हैं.

इसके पहले गूजर नेताओं ने बातचीत को सफल बताया था और उन्होंने मंगलवार को आयोजित भारत बंद वापस ले लिया है.

इधर राजस्थान सरकार ने गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा कायम कर दिया है.

प्रेक्षकों का मानना है कि राजस्थान सरकार ने ऐसा गूजर नेताओं पर दबाव बढ़ाने के लिए किया गया है.

भाजपा के राजस्थान के प्रभारी गोपीनाथ मुंडे ने सोमवार देर रात कहा कि मंगलवार को दूसरे दौर की बात हो सकती है.

राजस्थान सरकार ने अपने दो प्रतिनिधियों खान मंत्री लक्ष्मी नारायण दवे और सांवरलाल जाट को गूजर आंदोलनकारियों से बातचीत करने के लिए बयाना भेजा था.

ये दोनों मंत्री मंगलवार को सरकार को अपनी बातचीत की जानकारी देंगे

गूजरों की मांग

नेताओं ने सरकार से माँग की है कि वह गूजरों के गाँव में बिजली और पानी को बहाल करे.

उनका आरोप था कि सरकार से इसे रोक दिया है. साथ ही पुलिस कार्रवाई को नियंत्रित करने की माँग भी की गई.

हालांकि गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैसला ने वार्ता में भाग नहीं लिया था. पत्रकारों से बातचीत में किरोड़ी सिंह बैसला ने कहा कि वे धरना स्थल को छोड़ कर नहीं जाएँगे.

सरकारी प्रतिनिधियों से बातचीत बयाना में हुई क्योंकि गूजर नेताओं ने बातचीत के लिए जयपुर आने का निमंत्रण ठुकरा दिया था.

राज्य सरकार चाहती है कि अगले दौर की बातचीत जयपुर में हो.

ग़ौरतलब है कि गूजरों को जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे हैं. इस आंदोलन के दौरान 37 आंदोलनकारियों की मौत हो चुकी है.

पिछले 19 दिनों से चल रहे आंदोलन में ये पहला मौक़ा है जब सरकार और गूजरों के बीच सीधी बातचीत हुई.