रविवार, 08 जून, 2008 को 13:27 GMT तक के समाचार
नेपाल में सुप्रीम कोर्ट ने सेना से कहा है कि वो घुड़सवार फ़ौज को दूसरी जगह स्थानांतरित करे.
सेना को पारंपरिक तौर पर राजशाही का समर्थक माना जाता है लेकिन नेपाल में अब राजशाही समाप्त हो चुकी है. नेपाल के गृहमंत्री कह चुके हैं कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र काठमांडू स्थित शाही महल पंद्रह दिनों के अंदर छोड़ने और एक आम आदमी के तौर पर रहने को राज़ी हो गए हैं.
अब घुड़सवार फ़ौज को भी स्थानांतरित किया जा रहा है. कैवलरी यानी घुड़सवार फ़ौज को स्थानांतरित इस बिनाह पर किया जा रहा है कि ये घोड़े सरकारी इमारातों के मुख्य परिसर को प्रदूषित करते हैं.
नेपाल पिछले महीने गणतंत्र बन गया था लेकिन अब तक पूर्व राजा की घुड़सवार फ़ौज को अपना नाम नहीं बदलना पड़ा है. हांलाकि अब एक साल के अंदर उसे अपना मुख्यालय बदलना होगा.
बदबूदार...
घुड़सवार फ़ौज 19वीं सदी से ही नेपाली सेना का हिस्सा रही है. इसमें 100 से ज़्यादा घोड़े हैं और इसका काम ज़्यादातर साकेंतिक होता है.
लेकिन कई वकीलों ने एक याचिका दायर की थी कि इसे दूसरी जगह ले जाया जाए.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इसमें वकीलों और सुप्रीम कोर्ट का अपना हित जुड़ा हुआ है क्योंकि कोर्ट परिसर और नेपाल बार एसोसिएशन आलीशान सिंघा दरबार में स्थित है जहाँ कई मंत्रालय हैं और यहीं पर घुड़सवार फ़ौज का मुख्यालय भी है.
याचिका दायर करने वाले वकील प्रकाश शर्मा का कहना है, "घोड़ों के मल-मूत्र आदि से बदबू आती थी. आस-पास काम करने वालों को या तो अपने कमरों की खिड़कियाँ बंद करनी पड़ती थी या फिर वहाँ से जाना पड़ता था."
प्रकश शर्मा ने बीबीसी को बताया कि जजों के लिए ये असुविधाजनक है जो आजकल एक कार्यशाला में हिस्सा ले रहे हैं.
उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार घुड़सवार फ़ौज को वहाँ से हटना होगा.
अभी तक किसी दूसरी जगह का चयन नहीं हुआ है लेकिन प्रकाश शर्मान ने सुझाव दिया कि इसे कम घनी आबादी वाले इलाक़े में ले जाया जाए.
जजों का कहना है कि पूरे प्रकरण से लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है.