शुक्रवार, 06 जून, 2008 को 08:44 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी पूर्वोत्तर राज्य संवाददाता
असम की महिला नेताओं ने चिंता जताई है कि पिछले एक दशक में राज्य से वेश्यावृत्ति के लिए महिलाओं की ख़रीदफ़रोख़्त ख़तरनाक स्तर तक पहुँच गई है.
पुलिस के आँकड़े कहते हैं कि 1996 से 2006 के बीच हर रोज़ औसतन दो महिलाओं या बच्चियों को राज्य के बाहर ले जाया गया.
कुछ अधिकारी मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है.
महिला आयोग और इसे रोकने के अभियान में लगे लोगों का मानना है कि इसके पीछे ताक़तवर लोग हैं.
असम राज्य महिला आयोग की वरिष्ठ सदस्य सुमित्रा हज़ारिका गोगोई का कहना है, "नौकरी देने या शादी का लालच देकर बहुत सी महिलाओं को देश में देह व्यापार के लिए ले जाया जा रहा है."
उन्होंने कहा, "हाल ही में हमने ऐसी कई महिलाओं को इसके चंगुल से निकाला है और उन सबकी कहानी बेहद दुखद है."
बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में सुमित्रा हज़ारिका गोगोई ने कहा कि महिलाओं की इस ख़रीदफ़रोख़्त में राज्य के कई बड़े राजनीतिक नेताओं और बड़े पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं.
उनका कहना है, "यह एक बड़ा कांड है जिसका पर्दाफ़ाश होना है और जब हमारे पास सबूत जुट जाएँगे तो हम यह ज़ररु करेंगे."
ताक़तवर लोग
असम सरकार ने पिछले ही हफ़्ते सभी ज़िलापुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए थे कि वे महिलाओं और बच्चों के ख़रीदफ़रोख़्त में लगे लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करें.
सरकार ने यह निर्देश विधानसभा में महिला विधायकों की चिंता ज़ाहिर करने के बाद जारी किए हैं.
उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा के सत्र में सभी राजनीतिक दलों की 13 महिला विधायकों ने महिलाओं और बच्चों के ख़रीदफ़रोख़्त की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए इसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे.
उनका आरोप था कि एक ताक़तवर गिरोह ख़रीदफ़रोख़्त के धंधे में लगा हुआ है और इससे लाखों रुपए कमा रहा है.
इस मुद्दे पर हो रही चर्चा के दौरान वरिष्ठ मंत्री रॉकीबुल हुसैन ने कहा था कि इस धंधे में लगे हुए लोग ग़रीब परिवारों की महिलाओं को शादी या काम का प्रलोभन देकर ले जा रहे हैं.
मंत्री ने कहा, "एक ताक़तवर गिरोह महिलाओं और बच्चियों के अपहरण के काम में भी लगा हुआ है."
वर्ष 2000 से 2007 के बीच राज्य में अनैतिक देहव्यापार क़ानून के तहत 150 मामले दर्ज किए गए और 413 लोगों को बंदी बनाया गया.
48 मामलों में आरोपपत्र दाख़िल किए जा चुके हैं और 20 मामलों में अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है लेकिन 82 मामले अभी भी लंबित हैं.
लेकिन सुमित्रा गोगोई का कहना है, "बड़ी मछलियाँ अभी भी पकड़ में नहीं आई हैं."
बोडोलैंड पीपुल्स फ़्रंट की कमाली बसुमातारी का कहना है कि जो महिलाएँ इसकी शिकार हुई हैं वो बहुत ग़रीब परिवारों से हैं.
उनका कहना है, "झूठे वादे करके जब लड़कियों को राज्य से बाहर ले जाया गया तब उनके माँ-बाप को पता ही नहीं था कि उन्हें अनैतिक धंधों के लिए ले जाया जा रहा है."
बड़ी संख्या
पिछले साल पुलिस ने एक रिपोर्ट में कहा था कि वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2006 के बीच राज्य से 3,184 महिलाएँ और 3,840 बच्चियाँ लापता हुईं.
इसका अर्थ यह हुआ कि हर दिन औसतन दो महिलाओं की तस्करी की गई.
यह रिपोर्ट असम पुलिस और उनके अनुसंधान विभाग ब्यूरो ऑफ़ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट ने मिलकर तैयार की थी.
पुलिस अपराध शाखा के पूर्व प्रमुख जी भूइयाँ ने मानव तस्करी पर हुए एक सम्मेलन में पिछले साल कहा था, "मुझे लगता है कि महिलाओं और बच्चियों की तस्करी की संख्या इन आँकडों से बहुत अधिक होगी क्योकि कई मामलों की तो जानकारी ही नहीं मिल पाती."
उनका कहना था कि असम के गाँवों में जिस तरह ग़रीबी बढ़ रही है उसके चलते ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं.
जी भूइयाँ का कहना था कि शादी के नाम पर माँ-बाप को थोड़ा बहुत पैसा दे दिया जाता है और लड़कियाँ बेच दी जाती हैं.
महिलाओं की ख़रीदफ़रोख़्त के ख़िलाफ़ अभियान में जुटे रवि कांत का कहना है कि कई मामलों में तो चार-पाँच लड़कियों को असम से बाहर ले जाया गया और फिर उनकी खुली बोली लगाई गई जिसमें उनके लिए 10 हज़ार से 30 हज़ार तक की बोली लगाई गई.
हाल ही में पंजाब, हरियाणा और मुंबई में देहव्यापार से जुड़ी असम की कई महिलाओं को छुड़वाया गया है.
सुमित्रा गोगोई का कहना है, "इन लड़कियों को छुड़वाना न लड़की के लिए आसान होता है और न उनके बचाने गए लोगों के लिए क्योंकि इसके लिए अपराधियों से जूझना होता है."
पुलिस का कहना है कि उनकी जाँच से पता चला है कि इस काम में बाक़ायदा गिरोह लगे हुए हैं.
ये लोग परिवारजनों को बताते हैं कि एक बार काम पर लग जाएँ तो फिर लड़कियाँ परिवार को पैसा भेजती रहेंगी लेकिन वो एक बार राज्य से बाहर जाती हैं फिर ऐसा होता नहीं है.