गुरुवार, 05 जून, 2008 को 13:27 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, राजस्थान
पिछले एक पखवाड़े से राजस्थान में आंदोलन कर रहे गूजर समाज ने सरकार से बातचीत को ले कर मन बनाना शुरु किया है.
आंदोलनकारियों के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने शुक्रवार को आंदोलन के केन्द्र पीलूपुरा में देश भर के गूजर नेताओं को आमंत्रित किया है.
इन नेताओं से सलाह मशविरे के बाद बैंसला समुदाय का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास भेजा जाएगा.
इस बीच राज्य सरकार ने पीलूपुरा के कुछ इलाकों में तारबंदी कर दी है. सरकार का कहना है कि ऐसा अवांछित लोगों को रोकने के लिये किया गया है.
आंदोलन के दूसरे केंद्र सिकंदरा में आंदोलनकारियों ने अब तक बीस शवों के अंतिम संस्कार को रोक रखा है.
नेताओं की रिहाई की मांग
इन लोगों की मांग है कि जेल में बंद गूजर विधायकों, प्रहलाद गुंजल और अतर सिंह भड़ाना को छोड़ा जाए ताकि ये नेता शवों के अंतिम संस्कार में भाग ले सकें.
सिकंदरा के इन लोगों ने विरोध स्वरुप दौसा ज़िले की जल वितरण व्यवस्था ठप्प कर दी है.
राजस्थान में गूजर आंदोलन में अब तक 39 लोगों की मौत हो चुकी है और गूजर आरक्षण संघर्ष समिति के नेता अपनी माँगे माने जाने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा कर चुके हैं.
गूजरों के आंदोलन का ज़्यादा प्रभाव पूर्वी राजस्थान में है और आरक्षण की माँग पर गूजरों ने पिछले साल उग्र आंदोलन किया था.
तब 29 मई से चार जून के बीच कई बार आंदोलन ने हिंसक रूप अख़्तियार कर लिया और कुल 26 लोग मारे थे.
राज्य सरकार और गूजर प्रतिनिधियों के बीच समझौते के तहत आरक्षण की माँग पर विचार के लिए चोपड़ा आयोग का गठन किया गया.
इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट भी पेश कर दी लेकिन इसमें आरक्षण के बारे में स्पष्ट तौर पर कोई ज़िक्र नहीं किया गया.
अब गूजरों का कहना है कि उन्हें चोपड़ा आयोग से कोई मतलब नहीं है. वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया अपने वादे के मुताबिक कार्यकाल ख़त्म होने से पहले आरक्षण देने की सिफ़ारिश केंद्र सरकार से करें.
आंदोलन के चलते गूजरों से बातचीत के सभी प्रयास अब तक विफल रहे हैं.