बुधवार, 04 जून, 2008 को 03:49 GMT तक के समाचार
भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी बुधवार को चार दिनों की चीन यात्रा पर जा रहे हैं.
इस यात्रा के दौरान में चीन के विदेश मंत्री याँग जाइची से चर्चा करेंगे और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ सहित दूसरे चीनी नेताओं से भी मिलेंगे.
इस यात्रा के दौरान कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है जिसमें सीमा विवाद भी शामिल है.
प्रणव मुखर्जी की यात्रा के एक दिन पहले चीन ने कहा है कि दोनों देश एक दूसरे को ख़तरे की तरह नहीं देखते और मानते हैं कि वे बातचीत से एक स्वीकार्य हल तक पहुँच सकते हैं.
मुखर्जी जनवरी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के बाद चीन की यात्रा पर जाने वाले पहले बड़े नेता हैं.
वे वर्ष 2002 के बाद वहाँ जाने वाले पहले विदेश मंत्री हैं. उस समय विदेश मंत्री के रुप में जसवंत सिंह चीन गए थे.
प्रणव मुखर्जी की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में तिब्बतियों के आंदोलन को भारत ने सफलतापूर्वक नियंत्रित किया और ओलंपिक मशाल की यात्रा को बिना बाधा के संचालित किया है.
सीमा विवाद
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर 11 दौर की वार्ता हो चुकी है और इसमें अब तक कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई है.
हालांकि दोनों पक्ष दावा करते हैं कि इस मसले पर 'थोड़ी प्रगति' हुई है.
चीन ने कहा है कि वह राजनीतिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सीमा विवाद का हल तलाशने के लिए प्रतिबद्ध है.
इस बीच हैनान द्वीप में चीन ने परमाणु पनडुब्बियों का अड्डा स्थापित किया है और यह भारत के लिए चिंता का विषय है.
इसी तरह लद्दाख में अक्साई चीन के नज़दीक अपने हवाई अड्डे को भारत में फिर से शुरु करने का फ़ैसला किया है जो चीन के लिए चिंता का विषय हो सकता है.
हालांकि दोनों देशों ने इस चिंता का ज़ाहिर नहीं किया है.
इस यात्रा के दौरान प्रणव मुखर्जी की मुलाक़ात चीनी विद्वान जी ज़ियालिन से भी होनी है, जिन्होंने रामायण का चीनी में अनुवाद किया है और हाल ही में जिन्हें पद्मसम्मान से सम्मानित किया गया था.