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सोमवार, 02 जून, 2008 को 20:40 GMT तक के समाचार

फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल

वेबसाइट के ख़िलाफ़ आदिवासी सड़कों पर

छत्तीसगढ़ की एक सरकारी वेबसाइट पर आदिवासियों के संदर्भ में छपे 'आपत्तिजनक' लेखों के विरोध में हज़ारों आदिवासियों ने सोमवार को रायपुर-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को केशकाल नामक स्थान पर जाम कर दिया.

राजधानी रायपुर से जगदलपुर जाने वाली इस सड़क पर शाम होते होते सैंकड़ों वाहनों की लंबी कतार लग गई और सरकारी गाड़ियाँ भी वहाँ से निकल नहीं कर पा रहीं थीं.

बीच सड़क पर महिलाओं, बच्चों और समाज के अन्य लोगों के साथ धरने पर बैठे आदिवासी नेता लोकुराम कुर्रम ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया कि सोमवार दोपहर से शुरू हुआ ये धरना तब तक जारी रहेगा जब तक तत्कालीन कलेक्टर और वर्तमान बस्तर कमिश्नर आकर समाज से माफ़ी नहीं मांग लेते.

आदिवासी अपनी संस्कृति पर लिखे गए लेखों के लिए इन लोगों को ज़िम्मेदार मानते हैं.

गहरी आपत्ति

युवक अश्विनी कांगे का दावा था कि बस्तर पर तैयार एक सरकारी वेबसाइट पर बस्तर के आदिवासियों के लिए ‘जंगली’ शब्द का प्रयोग किया गया था.

इसमें कहा गया था कि वे पानी भी जानवरों कि तरह नदी या तालाब के पानी में मुहँ लगाकर पीते हैं और अगर कोई भी अबूझमाढ़ के इलाक़े में घुसने कि कोशिश करता है तो गोंड उसका शिकार तीर कमान से कर डालते हैं.

आदिवासियों को युवाओं के उनके सांस्कृतिक मेल जोल और 'शिक्षण' के स्थान घोटुल को सेक्स और डेटिंग का स्थान बताए जाने पर भी ऐतराज़ है.

अपनी परम्परा के ग़लत चित्रण से नाराज़ आदिवासी युवक कमिश्नर के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति और जनजाति क़ानून के तहत कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं.

उनका कहना था कि देर रात होने के बावजूद भी उनके साथ आठ से दस हज़ार आदमी धरने पर मौजूद हैं जो आगे भी वहाँ रहेंगे.

हालांकि केशकाल पुलिस ने धरने पर बैठे लोगों कि संख्या ढाई से तीन हज़ार के बीच बताई है.

इन सबके बावजूद कोई भी आला अधिकारी सोमवार देर रात तक इन आदिवासियों से मिलने नहीं आया था.

स्थानीय शासन का कहना है कि उसने आपत्तिजनक अंशों को वेबसाइट से हटा दिया है और इस सिलसिले में एक कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है.