सोमवार, 02 जून, 2008 को 10:45 GMT तक के समाचार
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सरकार ऐसे क़दम उठा रही है जिससे महँगाई भी कम हो जाए और तेज़ विकास दर की लय भी न टूटे.
उन्होंने उम्मीद जताई कि तमाम चुनौतियों के बावजूद देश की विकास दर में तेज़ी बनी रहेगी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्तीय उपायों का पूरा असर होने और सामान्य मॉनसून पहुँचने के बाद महँगाई की दर में कमी आ जाएगी.
समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ दिल्ली में वाणिज्य संगठन एसोचैम की वार्षिक आमसभा में प्रधानमंत्री ने 'तेल मूल्य नीति' का पक्ष लिया और उस संदर्भ में कही उनकी बातों से पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
उन्होंने कहा, "सब्सिडी खर्च को हम और नहीं बढ़ने दे सकते. हमारे पास इतनी गुंजाइश नहीं है कि हम अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सामान और तेल की बढ़ी क़ीमतों से उपभोक्ताओं को पूरी तरह बेअसर रख सकें."
प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल की आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों और उस लिहाज़ से भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के खुदरा मूल्यों की चर्चा की.
उन्होंने कहा, "पेट्रोल की क़ीमत भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का सही आईना नहीं है, यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती."
प्रधानमंत्री ने तेल की क़ीमतें तय करने वाली नीति पर राजनीतिक दलों से व्यापक आम सहमति बनाने की अपील की है.
तेल कंपनियों का दबाव
भारत की सरकारी तेल कंपनियाँ सरकार से तेल और गैस की खुदरा क़ीमतें बढ़ाने के लिए कह रही हैं.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें 127 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं.
उनकी दलील है कि लागत से कम क़ीमत पर उत्पाद बेचने से उनका घाटा 225 लाख करोड़ के पास पहुँच गया है.
तेल कंपनियों का कहना है कि हालात इतने ख़राब हैं कि कुछ महीने बाद उनके पास कच्चा तेल ख़रीदने के लिए भी पैसे नहीं होंगे.
हाल के दिनों में उपभोक्ता सामानों की बढ़ती क़ीमतें संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है.
सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदल इस बात से नाराज़ भी हैं कि सरकार ने उन उपायों पर अमल नहीं किया जो उन्होंने महँगाई रोकने के लिए प्रधानमंत्री को सुझाए थे.
महँगाई को लेकर पहले से ही गर्म वामपंथी दलों ने सरकार को तेल और गैस में कोई भी मूल्यवृद्धि करने से बचने कहा है.
सवाल जनता का
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में संसद में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की जीत ने सरकार पर महँगाई पर तुरंत काबू पाने का दबाव बढ़ा दिया है.
मनमोहन सिंह ने कहा है, "हमारी कोशिश है कि विकास दर की रफ़्तार को बिना तोड़े महँगाई की आशंकाओं पर लगाम लगाई जाए."
मुद्रास्फीति दर के नाम से प्रसिद्ध महँगाई की दर भारत में 17 मई को ख़त्म हुए सप्ताह में 8.1 फ़ीसदी तक पहुँच गई है जो ठीक पहले वाले सप्ताह में 7.82 फ़ीसदी थी.
महँगाई की दर करीब चार साल के बाद इतनी ऊपर गई है. एक सप्ताह मामूली कमी को छोड़ दें तो यह दर पिछले कुछ हफ़्तों से लगातार ऊपर जा रही है.
उन्होंने कहा, "हम बढ़ती महँगाई से कमज़ोर तबके के लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं."