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मंगलवार, 03 जून, 2008 को 09:17 GMT तक के समाचार

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तरप्रदेश

'मायावती' का वज़न कांशीराम से ज़्यादा

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने आलोचनाओं की परवाह न करते हुए लखनऊ में गोमती बांध पर बनाए गए सामाजिक परिवर्तन स्थल पर डेढ़ महीने पहले लगाई गई अपनी आदमक़द प्रतिमा को बदलवाकर दूसरी प्रतिमा लगवा दी है.

ये काम रविवार को रात शुरू हुआ और सोमवार की सुबह मायावती की नई प्रतिमा स्थापित कर दी गई.

मायावती की नई प्रतिमा 18 टन की है और इसका क़द पिछली मूर्ति से ज़्यादा है यानी साथ में लगी कांशीराम की मूर्ति के लगभग समतुल्य.

नई प्रतिमा के नैन-नक्श भी पिछली प्रतिमा से कुछ अलग हैं पर कंधे पर एक बड़ा सा पर्स नई प्रतिमा में भी टंगा हुआ है.

नई प्रतिमा का वजन कांशीराम की प्रतिमा से ज़्यादा है.

रविवार को आधी रात तक पुरानी प्रतिमा को मशीन के ज़रिए उतार लिया गया था.

लखनऊ विकास प्राधिकरण के एक इंजीनियर का कहना था कि ‘मैडम को अपनी पुरानी मूर्ति का चेहरा और क़दकाठी पसंद नहीं थी इसलिए उनके आदेश पर नई प्रतिमा लगाई जा रही है.’

जीते-जी प्रतिमा

मुख्यमंत्री मायावती ने पुरानी परंपराओं को दरकिनार करते हुए अब से डेढ़ महीने पहले अपने जीते-जी ही सरकारी ख़र्चे से सार्वजनिक स्थान पर अपनी प्रतिमा स्थापित करवा दी थी.

प्रतिमा का अनावरण प्रसिद्ध दलित नेता डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित जलसों के साथ किया गया था.

मायावती के साथ साथ सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक दिवंगत कांशीराम की प्रतिमा भी लगाई गई थी.

भरी सभा में उन्होंने कहा था कि जीते-जी प्रतिमा न लगाने की रूढिवादी परंपरा को बदलने की सलाह उन्हें उनके राजनीतिक गुरु कांशीराम ने दी थी.

प्रतिमा बदलने के काम में लगे एक मजदूर को यह समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर प्रतिमा पहले लगाई ही क्यों गई थी और अब उतारी क्यों जा रही है.

प्रतिमा की रखवाली के लिए पास में पुलिस की एक टुकड़ी भी तैनात थी.

मायावती की 'माया'

यहीं पास में विवादास्पद अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर भी काम चल रहा है. मुख्यमंत्री मायावती ने अपने पिछली सरकार में बड़ी रकम खर्च कर इसे बनवाया था.

लेकिन उन्हें इसका डिज़ाइन पसंद नहीं आया इसलिए पुराने निर्माण का एक बड़ा हिस्सा पिछले दिनों तोड़ दिया गया.

इसके विस्तार के लिए बगल का अंबेडकर स्टेडियम भी तोड़ दिया गया और बगल की ग्रीन बेल्ट की ज़मीन को भी इसमें मिला लिया गया.

इस बार सरकार में आने के बाद मायावती ने वीआईपी रोड पर बने पुराने अंबेडकर रैली स्थल को तोड़ कर उसे कांशीराम स्मारक में बदलने का काम शुरू किया जिस पर क़रीब 300 करोड़ की लागत आएगी.

रमा बाई के नाम से एक नया रैली स्थल बनाया जा रहा है जिसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं की ज़मीन ले ली गई है.

माल एवेन्यू में दो सरकारी बंगले तोड़कर बसपा का नया आलीशान दफ़्तर बना लिया गया और पुराने पार्टी दफ़्तर को तोड़ कर कांशीराम स्मारक बनाया जा रहा है.

मायावती ने माल एवेन्यू में अपने बंगले के विस्तार के लिए गन्ना आयुक्त का कार्यालय हटवा दिया.

जहाँ बहुत से लोग मायावती की इन योजनाओं को जनता के धन की बर्बादी बताते हैं वहीं मायावती के समर्थक इसे ठीक मानते हैं.