शनिवार, 31 मई, 2008 को 10:22 GMT तक के समाचार
अमरीकी रक्षामंत्री राबर्ट गेट्स ने बर्मा पर आरोप लगाया है कि राहत के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बाधित कर वह हज़ारों तूफ़ान पीड़ितों की मौत का कारण बना है.
गेट्स ने कहा कि बर्मा में चक्रवाती तूफ़ान नर्गिस के प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत सामग्री के साथ अमरीका के जहाज़ और विमान तूफ़ान के तत्काल बाद तैयार थे लेकिन बर्मा की सरकार ने उन्हें देश में घुसने की इजाज़त नहीं दी.
उनका कहना था कि जहाँ इंडोनेशिया और बाँग्लादेश ने प्राकृतिक आपदा के बाद मदद स्वीकार की वहीं बर्मा ने इस घड़ी में ऐसा नहीं किया.
अनुमान है कि इसी दो मई को आए नर्गिस नाम के तूफ़ान के बाद वहाँ 24 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए और भूख़ से जूझ रहे हैं.
तूफ़ान के कारण बर्मा में कम से कम 78 हज़ार लोगों की मौत हो गई जबकि अब भी 56 हज़ार से ज़्यादा लोग लापता हैं.
'बेसमय वापसी न हो'
सिंगापुर में सुरक्षा पर एक सम्मेलन में गेट्स ने कहा, "अमरीका के अलावा भी कई देशों ने महसूस किया कि मदद के उनके प्रयासों में अड़चनें पैदा की जा रही हैं."
उन्होंने कहा, "इन बाधाओं के बावजूद हम बर्मा में मदद पहुँचा रहे हैं और आगे भी मदद पहुँचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं."
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा था कि तूफ़ान पीड़ियों को ज़बरन उनके घर लौटाने की कोशिश 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' है.
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी तेरजे कैवडल की यह टिप्पणी उन ख़बरों के बाद आई जिसमें कहा गया था कि बर्मा की सैन्य सरकार ने सरकारी आपात राहत शिविरों से बेघर लोगों को निकालना शुरू कर दिया है.
ख़बरों में कहा गया है कि सैन्य सरकार इन पीड़ितों को बाँस और टेंट देकर विदा कर रही है और उनसे कह रही है कि वे अपनी ज़िंदगी फिर से बसाएँ.
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता कार्यालय के समन्वय प्रमुख कैवडल ने कहा कि वे राहत शिविरों के बंद करने की पुष्टि तो नहीं कर सकते.
लेकिन उन्होंने इसका भी ध्यान दिलाया कि उनके संगठन ने बिना किसी सेवा के तूफ़ान पीड़ितों को बेसमय उनके घर भेजने की सहमति नहीं दी.