शुक्रवार, 30 मई, 2008 को 09:58 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में गूजर आंदोलन जारी है और सवाई माधोपुर में पुलिस ने प्रदर्शन कर रही गूजरों की उग्र भीड़ पर फ़ायरिंग की है जिसमें दो लोग मारे गए हैं. इस घटना में एक पुलिसकर्मी व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है.
इस घटना के बाद राज्य में 23 मई को शुरु हुए गूजरों के आंदोलन में मृतकों की संख्या 39 हो गई है. मृतकों में एक पुलिसकर्मी भी है. गुरुवार को हरियाणा के पानीपत ज़िले में भी गूजरों के प्रदर्शन के दौरान दो प्रदर्शनकारी मारे गए थे.
गूजर अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे हैं. गूजर इस समय अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं लेकिन उनका मानना है कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने पर वे नौकरियों और शिक्षा में मिलने वाली आरक्षण की सुविधा का बेहतर फ़ायदा उठा पाएँगे.
दौसा में बंद
भरतपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक उमेश मिश्र ने बताया, "ज़िले के एक पहाड़ी इलाक़े में सुबह से ही गूजर आंदोलनकारी पुलिस कर्मियों को उक्सा रहे थे. अंत में पुलिस को फ़ायरिंग करनी पड़ी जिसमें दो लोग मारे गए."
शुक्रवार को दौसा में गूजरों का बंद चल रहा है. फ़िलहाल वहाँ से किसी अप्रिय घटना होने की सूचना नहीं मिली है.
उधर गूजरों ने फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के 14 शवों को लेने से इनकार कर दिया है जिनका हाल में सरकारी अस्पताल में प्रशासन ने पोस्ट मॉर्टम कराया था.
पीलूपुरा में रखे 12 शवों और सिकंदरा में रखे छह शवों का भी अभी फ़ैसला नहीं हो पाया है और ये शव गूजरों के कब्ज़े में हैं.
विश्वेंद्र सिंह की पहल
भरतपुर के राजघराने के विश्वेंद्र सिंह ने गूजरों से शांति बनाए रखने की अपील की है. वे भरतपुर से भाजपा सांसद हैं.
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे सरकार के साथ वार्ता में भाग लेने के लिए तैयार हैं.
चाहे विश्वेंद्र सिंह जाट हैं लेकिन उनका उस क्षेत्र में काफ़ी प्रभाव है और वे एक गूजर परिवार के दामाद हैं. उनका दावा है कि उनके पास ऐसे उपाय हैं जिससे इस स्थिति का समाधान हो सकता है.
गुरुवार को दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में रास्ता रोको आंदोलन के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने गूजरों को एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव दिया था.
उन्होंने कहा था कि गूजरों को घूमंतू जनजाति या 'डि-नोटिफ़ाइड ट्राइब' जैसी विशेष श्रेणी में रखकर आरक्षण दिए जाने की माँग पूरी तरह से संविधान सम्मत है.
गूजरों को बातचीत का प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने रखा.
एक टेलीविज़न चैनल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि गूजरों के लिए अलग कोटा तय करके आरक्षण देने का राज्य सरकार का प्रस्ताव पूरी तरह से संविधान सम्मत है.
उनका यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया जबकि ये ख़बरें आ रही थीं कि केंद्र सरकार ने वसुंधरा राजे के उस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया जिसमें अलग कोटा तय करके आरक्षण देने की योजना सुझाई गई थी.
गूजरों की ओर से जवाब नहीं
गुरुवार को बातचीत का संकेत भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान प्रभारी गोपीनाथ मुंडे की ओर से आया जब उन्होंने कहा, "हम गूजर नेताओं से हर हाल में बात करना चाहते हैं."
हालांकि गूजर नेताओं ने इन प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन ये संकेत रहे हैं कि गूजर भी इसके लिए सहमति बना रहे हैं.
समाचार एजेंसियों ने गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के क़रीबी डॉक्टर रुप सिंह के हवाले से कहा है कि कई बड़े गूजर नेता शुक्रवार को जयपुर के गूजर हॉस्टल में एक बैठक करने जा रहे हैं.