गुरुवार, 29 मई, 2008 को 03:21 GMT तक के समाचार
उमर फ़ारूक़
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
आंध्र प्रदेश में चार लोकसभा सीटों और 18 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में हुए मतदान में कम ही लोगों ने वोट डाला है. मतदान के दौरान कई लोगों को अपने नाम मतदाता सूची में नहीं मिले, पैसा और शराब बाँटे जाने के आरोप लगे और कुछ जगह झड़पें भी हुईं.
मतदान के बाद प्रारंभिक अंदाज़ों के मुताबिक पूरे क्षेत्र में औसतन 55 प्रतिशत से कम मतदान हुआ.
तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसदों और विधायकों के एक साथ संसद और विधानसभा से इस्तीफ़ा देने के कारण ये चुनाव कराने पड़े हैं.
जिस मुद्दे पर इन लोगों ने इस्तीफ़ा दिया था - यानी अलग तेलंगाना राज्य बनाए जाने की माँग - उसी को उन्होंने चुनावी मुद्दा भी बनाया था.
मतदान के लिए लगभग 63 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था. अधिकारियों ने 965 गाँवों के मतदान केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया था.
वारंगल में शराब की बोतलों से लदे आठ ट्रक बुधवार रात को ज़ब्त किए गए थे और ऐसी ही ख़बरें छह अन्य चुनावी क्षेत्रों से भी आई थीं.
मुर्शिदाबाद में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं और कुछ देर के वहाँ ख़ासा तनाव रहा.
इन सभी चुनावी क्षेत्रों में हज़ारों लोगों को निराश होकर तब लौटना पड़ा जब उन्हें अपने नाम मतदाता सूची में नहीं मिले. ग़ौरतलब है कि इनमें से अधिकतर लोगों के पास अपने फ़ोटो पहचान पत्र थे.
मतगणना एक जून को
इन उपचुनावों को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र अहम माना जा रहा है.
दो विधानसभा सीटों को छोड़ कर बाकी 16 सीटें तेलंगाना क्षेत्र में आती हैं.
प्रेक्षकों का कहना है कि उपचुनाव के नतीजों से राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगेगा.
टीआरएस ने कांग्रेस पर अलग तेलंगाना राज्य बनाने के वादे को भुला कर विश्वासघात करने का आरोप लगाया है.
कांग्रेस ने भी तेलंगाना की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. तेलुगूदेशम पार्टी 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और दो सीटें गठबंधन के तहत उसने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को दी है.
तेलुगूदेशम ने विकास को मुख्य मुद्दा बनाया है. पार्टी के नेता चंद्रशेखर बाबू नायडू शुरु से ही अलग तेलंगाना राज्य के ख़िलाफ़ माने जाते रहे हैं.