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गुरुवार, 29 मई, 2008 को 06:43 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

राजस्थान: जातीय संघर्ष में चार मारे गए

राजस्थान के झालावाड़ में गुरुवार को गुटीय संघर्ष में चार लोगों की मौत हो गई है जबकि आठ लोग घायल हो गए हैं.

मामला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विधानसभा क्षेत्र झालावाड़ का है. वहाँ तमर जाति और गूजरों के बीच हुए संघर्ष में ये मौतें हुई हैं.

हालाँकि, पुलिस का कहना है कि इसका आरक्षण आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है.

पुलिस का कहना है कि दोनों जातियों के बीच पहले से ही आपसी रंजिश चली आ रही है.

झालावाड़ में चलने वाली बसें ज़्यादातर तमर जाति के लोगों की हैं.

ऐसे में गूजर आंदोलन की वजह से पिछले कुछ दिनों से यहाँ बसें नहीं चल रही हैं.

लेकिन गुरुवार की सुबह तमर जाति के एक बस मालिक ने अपनी बस सड़क पर उतारने की कोशिश की.

इस पर गूजर भड़क गए और दोनों गुटों में जमकर हिंसा हुई. इसी हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए.

शहीदी दिवस की तैयारी

गूजरों ने गुरुवार को जयपुर बंद रखा है.

हालाँकि जयपुर में गूजरों की आबादी ज़्यादा नहीं है लेकिन फिर भी राज्य सरकार ने हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए राजधानी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है.

राजस्थान में गूजर बाहुल्य इलाकों में तनाव बना हुआ है. गूजर गुरुवार को अपने आंदोलन की बरसी मना रहे हैं.

गूजर इसे 'शहीदी दिवस' के तौर पर मनाना चाहते हैं. लेकिन प्रशासन ने उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी है.

पिछले साल गूजरों ने आरक्षण को लेकर आंदोलन शुरू किया था. जिसमें बाद में हिंसा हुई थी जिसमें 26 लोग मारे गए थे.

इस साल भी पिछले एक हफ़्ते में 41 लोग मारे जा चुके हैं.

राजस्थान के पाटौली इलाक़े में गूजरों ने तमाम रास्तों को जाम कर रखा है.

गूजरों के नेताओं ने 13 मई को 'शहीदी दिवस' मनाने की अनुमति मांगी थी. लेकिन प्रशासन ने कानून व्यवस्था की दुहाई देते हुए इन्हें इजाज़त नहीं दी थी.

हेलीकॉप्टर से पर्चे

गुरुवार की सुबह सरकार ने राज्य के गूजर बाहुल इलाक़ों में हेलीकॉप्टर से पर्चे भी गिरवाए हैं.

राज्य के छह ज़िलों के सैकड़ों कस्बों में तकरीबन तीन लाख पर्चे बरसाए गए.

इन पर्चों में लिखा है कि गूजर शांति बनाए रखें. अपना आंदोलन छोड़ दें. सरकार उनके लिए तमाम कोशिशें कर रही है.

गूजर बाहुल्य इलाक़ों दौसा, सिकंदरा, भरतपुर, पीलूपुरा में आंदोलन तेज़ होने की आशंका है.

इन इलाकों में पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के शवों का अंतिम संस्कार अब तक नहीं किया गया है.