गुरुवार, 29 मई, 2008 को 15:27 GMT तक के समाचार
अविनाश दत्त
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत सरकार ने पिछले दो माह से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे भोपाल गैस पीड़ितों की माँग पर एक विशेष आयोग के गठन का आश्वासन दिया है.
गैस पीड़ितों की बाक़ी माँगो पर भी विचार करने की बात कही गई है.
लेकिन दिल्ली में आंदोलन कर रहे और धरने पर बैठे पीड़ितों का कहना है कि जब तक सारी माँगे पूरी तरह से नहीं मानी जातीं तब तक उनका धरना जारी रहेगा.
भोपाल से दिल्ली तक पैदल चल कर आए , दिल्ली की चिलचिलाती धूप में सड़क के किनारे बैठे, नारे लगाते, इन लोगों से गुरूवार को आख़िरकार प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने मुलाक़ात की.
पृथ्वीराज चौहान ने प्रधानमंत्री का संदेश सुनाते हुए कहा की भिन्न-भिन्न केंद्रीय विभागों, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गैस पीड़ितों के पुनर्वास के लिए चलाई जा रही समितियों को मिलाकर एक आयोग का गठन किया जाएगा.
'शोध फिर शुरू हो'
साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को यह आदेश भी दिया जाएगा की वह गैस पीडितों पर क़रीब डेढ़ दशक से बंद पड़े भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के शोध को फिर से शुरू कराएँ.
अन्य माँगे, जैसे यूनियन कार्बाइड के 23 साल से फ़रार अधिकारी वॉरन ऍंडरसन की गिरफ़्तारी और यूनियन कार्बाइड के नए मालिक डाओ केमिकल्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई और आर्थिक नाकेबंदी की पर चौहान ने कहा की सरकार ना नहीं कर रही और इन पर विचार जारी है.
गैस पीड़ितों का कहना है कि उनकी बाक़ी माँगे भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण हैं जितना कि गैस पीड़ितों का पुनर्वास.
आंदोलन कर रहे पीड़ितों के नेता सतीनाथ षडंगी का कहना है, "आयोग बनाए जाने की हमारी माँग मान ली गई है पर डाओ केमिकल्स पर भारत के भीतर पूरी तरह से आर्थिक प्रतिबंध लगना चाहिए और रिलायंस को डाओ केमिकल्स के साथ व्यवसाय करने की इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए."
सतीनाथ षडंगी का कहना था की जब तक बाक़ी मांगे पूरी नहीं हो जातीं तब तक गैस पीड़ितों का धरना जारी रहेगा.