नेपाल में संविधान सभा की पहली बैठक में दो सदी पुरानी राजशाही व्यवस्था को ख़त्म करने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है.
इसी के साथ नेपाल में दो सौ वर्ष से भी ज़्यादा पुरानी राजशाही का अंत हो गया है.
संविधान सभा के इस फ़ैसले के बारे में नेपाल के वर्तमान राजा, राजा ज्ञानेंद्र की ओर से अभी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
नेपाल नरेश को राजमहल खाली करने के लिए महज 15 दिनों की समयसीमा दी गई है.
संविधान सभा को यह निर्णय लेने में बुधवार को कई घंटे लग गए क्योंकि राजशाही के अलावा सांसदों के बीच राष्ट्रपति प्रणाली की अंतरिम रणनीति बनाने में वक्त लग गया.
राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों के कारण ये बैठक बार-बार टलती रही पर अंततः फ़ैसला ले लिया गया और नेपाल गणराज्य के रूप में दुनिया के सामने आ गया है.
'ऐतिहासिक अवसर'
संविधान सभा के 575 नवनिर्वाचित सदस्यों को मंगलवार को शपथ दिलाई गई थी. कई सदस्यों ने अपनी मातृभाषा में शपथ ली.
कई प्रेक्षकों ने शपथ ग्रहण समारोह को नेपाल के भविष्य के लिहाज़ से ऐतिहासिक घटना बताया.
संविधान सभा नेपाल के लिए नए संविधान तैयार करेगी और नई व्यवस्था में नेपाल के राजमहल 'नारायणहिती पैलेस' की कोई भूमिका नहीं होगी.
हालांकि राजशाही के अस्तित्व पर अंतिम फैसला लेने से पहले संविधान सभा में मतदान कुछ घंटों के लिए टाल दिया गया था.
इस दौरान नेताओं के बीच अगले राष्ट्राध्यक्ष के चयन पर बातचीत होती रही. संविधान सभा के चुनावों में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) को सबसे अधिक सीटें मिली हैं.
माओवादियों के नेता प्रचंड पहले ही कह चुके थे कि संविधान सभा की पहली बैठक में ही नेपाल को संप्रभु गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित किया जाएगा.