बुधवार, 28 मई, 2008 को 04:14 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में गूजर आंदोलन तेज़ होता देख 15 ज़िलों में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू कर दिया गया है.
अनुसूचित जनजाति के कोटे के तहत आरक्षण की माँग कर रहे गूजरों का आंदोलन राजस्थान के बाहर भी फैलने की आशंका जताई जा रही है.
गूजर संगठनों ने गुरुवार को दिल्ली से सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चक्का जाम करने की घोषणा की है.
राजस्थान में गूजर आंदोलन में अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है और गूजर आरक्षण संघर्ष समिति के नेता अपनी माँगे माने जाने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा कर चुके हैं.
स्थिति गंभीर होता देख मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी जिसके बाद मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई.
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से गूजरों को अलग से चार से छह फ़ीसदी आरक्षण देने की बात कही गई थी.
केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर विधि मंत्रालय से राय माँगी है.
इस बीच गूजरों की माँग पर राज्य सरकार ने भी छह सदस्यीय एक कमेटी बनाई है. इसमें तीन मंत्री और तीन आला अधिकारी शामिल हैं.
बढ़ी सुरक्षा
पिछले वर्ष 29 मई को दौसा ज़िले के पाटोली में गूजर आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन में हिंसा हुई थी जिसकी बरसी को देखते हुए सेना की तीन और टुकड़ियों को राजस्थान भेजा गया है.
गूजर समुदाय इस मौके पर मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक आयोजन कर रहा है.
इसे देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इस बीच 23 मई को हुई हिंसा में एक सिपाही की मौत का ज़िम्मेदार गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को मानते हुए पुलिस ने उनके विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज किया है.
पुलिस ने बैसला के ख़िलाफ़ बयाना थाने में हिंसा और राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया है.
उधर राजस्थान हाईकोर्ट ने गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला और 12 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है.
पिछली बार गूजर आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के दौरान राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.
सरकार ने अदालत से कहा था कि वह गूजर नेताओं को निर्देश दे कि बिना ज़िला प्रशासन की अनुमति के सभा-प्रदर्शन न किया जाए.
हाईकोर्ट ने इस संबंध में गूजर नेताओं को निर्देश दिए थे.