मंगलवार, 27 मई, 2008 को 16:03 GMT तक के समाचार
दिल्ली से सटे नोएडा के आरुषि हत्याकांड मामले में मुख्य अभियुक्त डॉक्टर राजेश तलवार के परिवार ने इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच आयोग (सीबीआई) से करवाने की माँग की है.
डॉक्टर राजेश तलवार के भाई राकेश तलवार और उनके वकील पीनाकी मिश्र ने मंगलवार को कहा कि नोएडा की पुलिस इस मामले में लीपापोती कर रही है.
पीनाकी मिश्र का कहना था, "ऐसा प्रतीत होता है कि डॉक्टर राजेश तलवार की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने अपनी जाँच और क़ातिलों का पता लगाने की कोशिशें बंद कर दी हैं. हम निष्पक्ष जाँच चाहते हैं और हमें नोएडा पुलिस पर और उसकी जाँच में विश्वास नहीं है."
उधर एक स्थानीय अदालत ने डॉक्टर राजेश तलवार की ज़मानत याचिका नामंज़ूर करते हुए उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है.
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एके सिंह ने पुलिस के रिमांड के प्रार्थनापत्र को मंज़ूरी दे दी.
इससे पहले अभियोजन पक्ष यानी पुलिस ने दलील दी थी कि इस मामले में जाँच पड़ताल के लिए अभियुक्त की पुलिस रिमांड ज़रूरी है.
हालांकि पुलिस ने तलवार को सात दिन की रिमांड पर लेने की याचिका दी थी लेकिन अदालत ने सिर्फ़ तीन दिन की रिमांड को ही मंज़ूरी दी है.
स्वास्थ्य के आधार पर और मामले की जाँच में पैदा हो रहे विवादों के आधार पर तलवार की ज़मानत की दो याचिकाएं दाखिल की गई थीं.
डॉक्टर तलवार ने अदालत में कहा कि उन्हें फंसाया जा रहा है और उन्होंने पुलिस के सामने कभी अपनी बेटी की हत्या करना कबूल नहीं किया.
डॉक्टर राजेश पर आरोप
चौदह वर्षीय आरुषि का शव 16 मई 2008 की सुबह उनके घर में मिला था.
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में मेरठ ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक गुरदर्शन सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि आरुषि और परिवार के नौकर हेमराज की हत्या डॉक्टर राजेश तलवार ने ही की थी.
पुलिस ने शुरुआती जाँच के बाद कहा था कि आरुषि की गर्दन पर किसी तेज़ हथियार या किसी अन्य चीज़ से वार हुआ.
पुलिस के अनुसार ऐसी ही परिस्थितियों में डॉक्टर राजेश तलवार के परिवार के नौकर हेमराज का शव भी एक दिन बाद उनके घर की छत पर मिला था.
आरुषि की माँ डॉक्टर नूपुर ने शनिवार को एक भारतीय समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि उनके पति डॉक्टर राजेश तलवार निर्दोष हैं और हत्यारे अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.
पुलिस के पास इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं है.
हत्या से जुड़े कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं और पुलिस उनके बारे में कोई स्पष्ट तर्क नहीं रख सकी है.